गणतंत्र दिवस परेड में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को तीसरी कतार में बैठाए जाने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन बताया, जबकि बीजेपी ने नियमों के अनुसार व्यवस्था होने का दावा किया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तीसरी कतार में
New Delhi: गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को तीसरी कतार में बैठाए जाने को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस व्यवस्था को स्थापित प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए केंद्र सरकार पर विपक्ष का अपमान करने का आरोप लगाया है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैठने की पूरी व्यवस्था संवैधानिक नियमों और वरीयता क्रम के अनुसार की गई थी।
इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से सबसे तीखी प्रतिक्रिया पार्टी नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के नेताओं के साथ ऐसा व्यवहार संवैधानिक परंपराओं और लोकतांत्रिक शिष्टाचार के अनुरूप है। सुरजेवाला ने कहा कि यह घटना सरकार की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है, न कि किसी निष्पक्ष प्रोटोकॉल को। उनके अनुसार, लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय पर्व पर विपक्ष का अपमान स्वीकार्य नहीं हो सकता।
क्या देश के विपक्ष के नेता के साथ ऐसा व्यवहार किसी मर्यादा, परंपरा और प्रोटोकॉल के मापदंड पर खरा उतरता है ?
ये केवल हीन भावना से ग्रस्त सरकार की कुंठा दिखाता है ।
प्रजातंत्र में मतभेद रहेंगे मगर श्री @RahulGandhi के साथ किया जाने वाला ये व्यवहार अस्वीकार्य है। pic.twitter.com/b4mdU9BU7G
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) January 26, 2026
कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई। सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि यह मामला सिर्फ बैठने की पंक्ति का नहीं, बल्कि संवैधानिक पदों की गरिमा से जुड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और एल.के. आडवाणी जैसे विपक्षी नेता गणतंत्र दिवस समारोह में अग्रिम पंक्तियों में बैठते थे। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे दोनों अहम संवैधानिक पदों पर हैं और उन्हें पहली पंक्ति में बैठाया जाना चाहिए था।
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोहों में बैठने की व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी ‘टेबल ऑफ प्रीसिडेंस’ यानी वरीयता क्रम के अनुसार तय होती है। यह सूची राज्य और औपचारिक अवसरों पर लागू होती है और इसमें पद की संवैधानिक हैसियत को आधार बनाया जाता है, न कि राजनीतिक दल या विचारधारा को।
वरीयता तालिका के अनुच्छेद 7 के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता, लोकसभा अध्यक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश और पूर्व प्रधानमंत्रियों के बाद केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के साथ रखे जाते हैं। यही क्रम गणतंत्र दिवस जैसे आयोजनों में भी लागू होता है। यह सूची सरकार के दैनिक प्रशासनिक कामकाज में नहीं, बल्कि औपचारिक आयोजनों के लिए उपयोग की जाती है।
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बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि बैठने की व्यवस्था पूरी तरह तय प्रोटोकॉल के अनुसार थी। उन्होंने कांग्रेस पर ‘परिवार-केंद्रित राजनीति’ और अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान से ऊपर खुद को मानने की सोच रखती है। पूनावाला ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के आसपास कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी बैठे थे, लेकिन उन्होंने इसे मुद्दा नहीं बनाया। उनके मुताबिक, कांग्रेस हर राष्ट्रीय कार्यक्रम को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश करती है।