‘लाल किला ब्लास्ट का मास्टरमाइंड जेल में ही रहेगा’: NIA की दलीलों के बाद Delhi High Court ने खारिज की जमानत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 2025 के लाल किला कार बम विस्फोट के मुख्य आरोपी जसीर बिलाल वानी की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए वानी को राहत देने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी को आतंकवादी साजिश का एक प्रमुख सदस्य और तकनीकी मददगार बताया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 August 2026, 11:22 AM IST

New Delhi: न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश की अपील याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में वानी ने निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी न होने का हवाला देते हुए 'डिफॉल्ट जमानत' की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने एनआईए की दलीलों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता देने का गंभीर आरोप

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के रहने वाले 20 वर्षीय जसीर बिलाल वानी पर 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला परिसर के समीप हुए भयानक कार बम ब्लास्ट की मुख्य साजिश रचने का आरोप है। एनआईए की जांच के अनुसार, वानी ने सह-आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी के साथ मिलकर आतंकवादी नेटवर्क को आधुनिक तकनीकी सहायता मुहैया कराई थी।

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रॉकेट बनाने और ड्रोन मॉडिफिकेशन की रच रहा था साजिश

जांच एजेंसी ने अदालत के सामने खुलासा किया कि वानी सिर्फ ब्लास्ट की साजिश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह ड्रोन में तकनीकी बदलाव (मॉडिफिकेशन) करने और स्वदेशी रॉकेट तैयार करने के प्रयासों में भी शामिल था। एजेंसी ने तर्क दिया कि ऐसे घातक मंसूबे रखने वाले आरोपी को जमानत मिलने से देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  19 August 2026, 11:22 AM IST