
प्रतीकात्मक तस्वीर ( Img: Google)
New Delhi: तेल और युद्ध के बीच अब मौसम भी बड़ा जोखिम बनकर सामने आ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार सुपर एल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है, जो वैश्विक जलवायु को प्रभावित कर सकता है। NOAA के अनुसार इसकी संभावना 61% तक पहुंच चुकी है। इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होगा- कहीं बाढ़, कहीं सूखा और कहीं असामान्य गर्मी। दक्षिण एशिया में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में मौसम का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है।
भारत के लिए एल नीनो हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी से मई के बीच इसके कारण 26% तक कम बारिश हो सकती है। मानसून सीजन में भी 22% तक वर्षा की कमी देखी जा सकती है। हालांकि भारतीय कृषि अब पहले से ज्यादा विविध हो चुकी है, जिससे इसका असर थोड़ा कम हो सकता है। 1950 के बाद आए 16 एल नीनो वर्षों में से कई बार भारत में सूखे की स्थिति बनी है, जिससे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
SBI रिसर्च के मॉडल के अनुसार केवल एल नीनो का भारत की GDP पर बहुत मामूली असर होता है, लेकिन अगर इसके साथ सूखा जुड़ जाए तो स्थिति बदल सकती है। ऐसे हालात में GDP ग्रोथ पर औसतन 0.20% तक का असर देखा जा सकता है, जबकि गंभीर स्थिति में यह 0.65% तक पहुंच सकता है।
Location : New Delhi
Published : 20 April 2026, 2:40 PM IST