राघव चड्ढा की सुरक्षा पर सियासी संग्राम! पंजाब ने हटाई सिक्योरिटी, केंद्र ने दिया Z कवर

AAP और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी अब सुरक्षा तक पहुंच गई है। पंजाब सरकार ने जहां उनकी सुरक्षा वापस ले ली, वहीं केंद्र ने उन्हें Z कैटेगरी सुरक्षा दे दी है। इस फैसले के पीछे IB की रिपोर्ट बताई जा रही है, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 15 April 2026, 2:12 PM IST

New Delhi: पंजाब की सियासत में एक नया ‘सुरक्षा कांड’ खड़ा हो गया है, जिसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी के बड़े नेता राघव चड्ढा को पहले उनकी ही सरकार ने सुरक्षा से वंचित कर दिया और कुछ ही घंटों में केंद्र सरकार ने उन्हें Z कैटेगरी की हाई सिक्योरिटी दे दी।

पंजाब सरकार ने क्यों हटाई सुरक्षा?

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने अचानक राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लेने का फैसला लिया। यह वही सुरक्षा थी जो उन्हें 2022 में सरकार बनने के बाद दी गई थी और लगातार जारी थी। लेकिन हाल के महीनों में पार्टी और चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी ने इस फैसले को जन्म दिया। दरअसल, पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया और उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई।

केंद्र ने क्यों दिया Z सिक्योरिटी कवर?

पंजाब सरकार के फैसले के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राघव चड्ढा को Z कैटेगरी की सुरक्षा दे दी। सूत्र बताते हैं कि यह फैसला इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। अब राघव चड्ढा को दिल्ली और पंजाब में Z सिक्योरिटी मिलेगी, जबकि देश के अन्य हिस्सों में Y+ सुरक्षा दी जाएगी।

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Z सिक्योरिटी में कितना मजबूत होता है सुरक्षा घेरा?

Z कैटेगरी सुरक्षा भारत में सबसे मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। इसमें करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। इनमें NSG कमांडो, दिल्ली पुलिस, CRPF और ITBP के जवान शामिल होते हैं। यह सुरक्षा आमतौर पर उन लोगों को दी जाती है, जिनकी जान को उच्च स्तर का खतरा होता है।

पार्टी से टकराव और बढ़ती दूरी

राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच मतभेद लंबे समय से चल रहे थे, लेकिन अब ये खुलकर सामने आ चुके हैं। पार्टी के कई बड़े नेताओं जैसे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के जेल जाने के दौरान चड्ढा की चुप्पी पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरी।

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“मुझे खामोश किया जा सकता है, हराया नहीं”

जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में बोलने से रोका गया, तो उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें खामोश जरूर किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता। इसके बाद उन्होंने लगातार वीडियो जारी कर पार्टी के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया।

ED की एंट्री से और गरमाई सियासत

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अशोक मित्तल के जालंधर स्थित घर और उनकी यूनिवर्सिटी पर छापेमारी की। अशोक मित्तल वही नेता हैं, जिन्हें राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में उपनेता बनाया गया है।

Location :  New Delhi

Published :  15 April 2026, 2:12 PM IST