Islamabad: ‘राजनीति करनी है तो वर्दी उतारें’… मौलाना फजलुर रहमान के एक बयान से पाकिस्तान में मचा सियासी तूफान

Islamabad: पाकिस्तान में सेना और राजनीति के रिश्तों को लेकर बहस तेज हो गई है। जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना पर राजनीति में दखल देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि राजनीति करनी है तो वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें। उनके बयान के बाद पाकिस्तान की सियासत में हलचल बढ़ गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 13 July 2026, 10:46 AM IST

New Delhi: पाकिस्तान में Pakistan Army Politics को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना की भूमिका पर कहा कि सेना राजनीति में सक्रिय होना चाहती है तो उसे वर्दी उतारकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव लड़ना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

'वर्दी उतारिए और चुनाव लड़िए'

पंजाब के कसूर में आयोजित जनसभा में मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि सेना का दायरा संविधान से तय होता है और उसे उसी सीमा के भीतर रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सेना राजनीतिक फैसलों में भूमिका निभाना चाहती है, तो उसे वर्दी छोड़कर जनता के बीच चुनाव लड़ना चाहिए। तभी यह स्पष्ट होगा कि जनता का वास्तविक समर्थन किसके साथ है।

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को लेकर भी उठाए सवाल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान के कई हिस्सों में सरकार की पकड़ कमजोर पड़ चुकी है और हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उनका कहना था कि अब यही स्थिति धीरे-धीरे खैबर पख्तूनख्वा तक भी पहुंच रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि देश के हालात बिगड़ने पर जिम्मेदार लोग आखिर कहां हैं।

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सेना प्रमुख की अपील पर भी जताई आपत्ति

हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने नागरिकों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सेना का साथ देने की अपील की थी। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि देश की सुरक्षा करना सेना की संवैधानिक जिम्मेदारी है। नागरिकों से यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि वे राज्य की लड़ाई लड़ें। उन्होंने कहा कि सेना को देश की सुरक्षा के लिए वेतन और संसाधन दिए जाते हैं, इसलिए उसे अपनी जिम्मेदारियां स्वयं निभानी चाहिए।

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बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से सेना और राजनीतिक नेतृत्व के संबंधों को लेकर बहस और तेज हो सकती है। हालांकि सेना की ओर से इन टिप्पणियों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Location :  New Delhi

Published :  13 July 2026, 10:46 AM IST