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CJP के 'संसद चलो' मार्च के बाद बातचीत की तैयारी (Img- Dynamite News)
New Delhi: नीट (NEET) परीक्षा घोटाले के खिलाफ पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर सुलग रही गुस्से की चिंगारी आज संसद के मानसून सत्र के पहले दिन एक बड़े आंदोलन में बदल गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के आह्वान के बाद दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली इलाके में धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात कर दी थी, लेकिन छात्रों और प्रदर्शनकारियों के हौसले के आगे बैरिकेड्स छोटे पड़ गए। जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
मार्च की शुरुआत से ठीक पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने आंदोलन के भटकने की आशंकाओं पर विराम लगाते हुए कहा, "हम पिछले 30 दिनों से शांति से लड़ रहे हैं।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इस देश के युवाओं के भविष्य के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी है। हमारा गुस्सा व्यवस्था के खिलाफ है, इसलिए कोई भी गलत कदम नहीं उठाएगा। आंदोलन को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को हमें नाकाम करना है।"
सफदरजंग अस्पताल में 'अवैध हिरासत' का आरोप झेल रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आज भी जारी है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। अस्पताल से ही उन्होंने देश के युवाओं के नाम एक भावुक संदेश भेजा है।
यह हमारी पहली जीत है! तिरंगा हाथ में लेकर अभिजीत दिपके ने समर्थकों में भरा जोश#JantarMantar #cjpprotest #dharmendraPradhan #resignation #ChaloSansad @CJP_for_India@Wangchuk66 #चलोसंसद pic.twitter.com/QBoogbrfgw
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) July 20, 2026
वांगचुक ने कहा कि वे बेहद खुश हैं कि देश का युवा आखिरकार इस बेजान और बहरे सिस्टम के खिलाफ जाग गया है, जो छात्रों की आवाज सुनने को तैयार नहीं था।
इस पूरे विवाद में आज सबसे बड़ा और नया मोड़ तब आया जब चौतरफा घिरे प्रशासन ने आखिरकार CJP नेतृत्व से बातचीत की पेशकश की। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा: "प्रशासन अब सरकार से बातचीत कराने की कोशिश में जुटा है। हालांकि वे बहुत देर से आए हैं, फिर भी हम खुले दिल से चर्चा के लिए तैयार हैं। अभी तक उनकी तरफ से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है, इसलिए अब अंतिम फैसला सरकार को ही करना है।"
हालांकि वे बहुत देर से आए हैं, लेकिन हमारा दिल खुला है। हम छात्रों के हक के लिए बात करने को तैयार हैं, बशर्ते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा सुधारों पर ठोस बात हो। अब गेंद सरकार के पाले में है।"
Location : New Delhi
Published : 20 July 2026, 10:00 AM IST