कांग्रेस से बाहर, अब खुद की पार्टी! नवजोत कौर सिद्धू का बड़ा दांव, क्या बदल जाएगी पंजाब की राजनीति?

नवजोत कौर सिद्धू के नए राजनीतिक कदम ने पंजाब की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस से अलग होने के बाद उन्होंने ऐसा फैसला लिया है, जो चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। क्या उनकी नई पार्टी वाकई बड़ा असर डालेगी या सिर्फ वोटों का बंटवारा करेगी?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 7 April 2026, 2:17 PM IST

Chandigarh: पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस से निष्कासन के करीब दो महीने बाद डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ (BRP) के गठन का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज कर दी है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी जानकारी

डॉ. नवजोत कौर सिद्धू, जो पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी नई पार्टी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पंजाब को फिर से “गोल्डन स्टेट” बनाना और लोगों को न्याय दिलाना है।

नवजोत कौर का यह कदम ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति पहले से ही बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है। वर्तमान में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन अब एक नई पार्टी की एंट्री से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

कैसा रहा अब तक का राजनीतिक सफर?

अगर उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो नवजोत कौर सिद्धू का करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद एक गायनेकोलॉजिस्ट के रूप में काम किया और पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी रहीं। इसके बाद 2012 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा।

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उन्होंने 2012 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमृतसर पूर्व से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय अकाली दल-भाजपा सरकार में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी भी दी गई थी। हालांकि, कुछ वर्षों बाद उनका भाजपा से मोहभंग हो गया और 2016 में उन्होंने अपने पति के साथ पार्टी छोड़ दी।

भाजपा के बाद थामा कांग्रेस का हाथ

इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और लंबे समय तक पार्टी के साथ रहीं। 2017 और 2022 के चुनावों में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि अपने पति नवजोत सिंह सिद्धू के लिए अमृतसर पूर्व सीट छोड़ी। हालांकि, 2022 के चुनाव में सिद्धू को हार का सामना करना पड़ा।

नवजोत कौर सिद्धू का राजनीतिक सफर ही नहीं, व्यक्तिगत जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। 2022-23 के दौरान उन्हें स्टेज-2 कैंसर का पता चला, जिसके चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। 2024 में कैंसर से जंग जीतने के बाद उन्होंने एक बार फिर राजनीति में वापसी की, लेकिन इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व से उनके मतभेद खुलकर सामने आए।

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दिसंबर 2025 में उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए “500 करोड़ रुपये” तक का खेल होता है। इस बयान के बाद पार्टी में विवाद बढ़ गया और उन्हें निलंबित कर दिया गया। बाद में फरवरी 2026 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

अब अपनी नई पार्टी के जरिए नवजोत कौर सिद्धू एक नई राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में हैं। उनके बयानों में ‘राष्ट्रवाद’, ‘आध्यात्मिकता’ और ‘पंजाब के विकास’ जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है, जिससे साफ है कि वे एक अलग राजनीतिक नैरेटिव गढ़ना चाहती हैं।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नवजोत सिंह सिद्धू इस नई पार्टी में क्या भूमिका निभाएंगे, लेकिन माना जा रहा है कि वे अपनी पत्नी का समर्थन कर सकते हैं।

Location :  Chandigarh

Published :  7 April 2026, 2:17 PM IST