चांद पर अचानक बना 728 फुट चौड़ा गड्ढा! वैज्ञानिक भी हैरान, 132 साल में होती है ऐसी घटना

नासा के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर करीब 728 फुट चौड़ा और 141 फुट गहरा नया इम्पैक्ट क्रेटर खोजा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इतनी बड़ी टक्कर चंद्रमा पर औसतन करीब 132 साल में एक बार होती है। इस खोज से चंद्रमा की मिट्टी, अंतरिक्षीय टक्करों और भविष्य के Moon Base की सुरक्षा को समझने में मदद मिल सकती है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 17 September 2026, 3:06 PM IST

New Delhi: चांद की सतह को लेकर वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज मिली है, जिसने अंतरिक्ष में होने वाली बड़ी टक्करों और भविष्य के मून मिशन को लेकर नई जानकारी सामने रखी है। नासा के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर एक विशाल इम्पैक्ट क्रेटर की पहचान की है। यह गड्ढा करीब 728 फुट यानी 222 मीटर चौड़ा और 141 फुट यानी 43 मीटर गहरा है। इसका आकार रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम से भी बड़ा बताया जा रहा है।

करीब 132 साल में एक बार होती है ऐसी टक्कर

शोधकर्ताओं के अनुसार, चंद्रमा पर इस आकार की टक्कर बेहद दुर्लभ होती है। अनुमान है कि इतनी बड़ी घटना औसतन करीब 132 साल में एक बार होती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे चंद्रमा की सतह पर किसी दुर्लभ घटना का प्रत्यक्ष अध्ययन करने का महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।

NASA के LRO ने जुटाए तस्वीरों से सुराग

चंद्रमा की सतह की निगरानी करने वाला नासा का Lunar Reconnaissance Orbiter इस खोज में अहम रहा। मई 2024 में LRO ने चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से की तस्वीरें ली थीं। बाद में वैज्ञानिकों ने उपलब्ध तस्वीरों और आंकड़ों के विशाल संग्रह का विश्लेषण किया। इसी प्रक्रिया के दौरान अगस्त 2025 में शोधकर्ताओं की नजर इस नए क्रेटर पर पड़ी।

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टक्कर का असर 100 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस अंतरिक्षीय पिंड ने चंद्रमा की सतह से टक्कर मारी, उसका असर सिर्फ क्रेटर तक सीमित नहीं रहा। इस टक्कर से निकला मलबा चंद्रमा की सतह पर 100 किलोमीटर से ज्यादा के क्षेत्र में फैल गया। टक्कर के दौरान धूल और चट्टानी सामग्री काफी दूर तक उछली।

क्रेटर के आसपास मिला ठंडा क्षेत्र

इस खोज के साथ एक अन्य अध्ययन में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। UCLA के वैज्ञानिक डेविड पेज से जुड़े अध्ययन में क्रेटर के आसपास करीब 7 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र पाए जाने की बात कही गई है। इस तरह के आंकड़ों से वैज्ञानिकों को चंद्रमा की ऊपरी सतह की मिट्टी और उसकी संरचना को समझने में मदद मिल सकती है।

चांद की मिट्टी कितनी तेजी से बदलती है?

इस खोज से चंद्रमा की सतह के लगातार बदलने की प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिली है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बाहरी अंतरिक्ष से आने वाले छोटे-बड़े पिंडों की टक्करों के कारण चंद्रमा की ऊपरी करीब 2 सेंटीमीटर मिट्टी हर 80 हजार साल में पूरी तरह उलट-पुलट हो सकती है।

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अपोलो मिशन के पैरों के निशान भी हमेशा नहीं रहेंगे

चंद्रमा पर मानव मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने जो पैरों के निशान छोड़े थे, वे भी हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं रहेंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रमा की सतह पर लगातार होने वाली छोटी-बड़ी टक्करों और उससे पैदा होने वाली हलचल के कारण ये निशान धीरे-धीरे मिट सकते हैं।

भविष्य के Moon Base के लिए क्यों अहम है यह खोज?

चंद्रमा पर भविष्य में इंसानों को लंबे समय तक रखने की योजनाओं के बीच यह खोज वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए खास महत्व रखती है। चंद्रमा पर भविष्य के बेस, उपकरण और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी बड़े अंतरिक्षीय पिंड की टक्कर से कितना मलबा और धूल पैदा हो सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  17 September 2026, 3:06 PM IST