कानूनी दुनिया का बड़ा नाम जस्टिस अशोक भूषण रिटायर, NCLAT को कहा अलविदा

जस्टिस अशोक भूषण आज नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के चेयरपर्सन पद से रिटायर हो गए हैं। उनका लंबा कानूनी करियर इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रहा है। उन्होंने कॉर्पोरेट और इनसॉल्वेंसी मामलों में कई अहम फैसले दिए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 7:45 PM IST

New Delhi : देश की कानूनी व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले जस्टिस अशोक भूषण अपने पद से रिटायर हो गए हैं। वह नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के चेयरपर्सन थे। उनका कार्यकाल कॉर्पोरेट कानून और दिवालियापन से जुड़े कई बड़े मामलों के लिए याद किया जाएगा। जस्टिस भूषण का कानूनी सफर बहुत लंबा और अनुभव से भरा रहा है। जिसमें उन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक काम किया।

NCLAT में चार साल का अहम सफर

जस्टिस अशोक भूषण ने 8 नवंबर 2021 को NCLAT के चेयरपर्सन का पद संभाला था। शुरुआत में उनका कार्यकाल चार साल के लिए था। बाद में 2025 में उन्हें दोबारा इस पद पर नियुक्त किया गया। वह 4 जुलाई 2026 तक इस पद पर रहने वाले थे। अब उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है क्योंकि वे 70 साल की आयु पूरी कर चुके हैं।

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इलाहाबाद से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

जस्टिस भूषण का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 1956 में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की और 1979 में वकालत शुरू की। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई अहम केस लड़े। साल 2001 में उन्हें हाईकोर्ट का जज बनाया गया। बाद में वे केरल हाईकोर्ट के जज और फिर चीफ जस्टिस भी बने। 2016 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए।

महत्वपूर्ण मामलों में बड़ी भूमिका

NCLAT में रहते हुए जस्टिस भूषण ने कई बड़े मामलों में फैसले दिए। उन्होंने गूगल और व्हाट्सएप जैसे मामलों में कंपटीशन लॉ को लेकर अहम टिप्पणियां कीं। इन फैसलों से डिजिटल बाजार में नियमों को लेकर नई दिशा मिली। इसके अलावा इनसॉल्वेंसी मामलों में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए।

Location :  New Delhi

Published :  4 July 2026, 7:45 PM IST