
PSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, सड़क पर उतरे हजारों अभ्यर्थी (Source: Dynamite News)
New Delhi: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। 25 जुलाई से शुरू हुआ यह आंदोलन अब 16वें दिन में पहुंच चुका है। रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। कहीं परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो कहीं रिजल्ट और भर्ती को लेकर अभ्यर्थी परेशान हैं। छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हो और अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने अपने चर्चित शो The MTA Speaks में इसका पूरा विश्लेषण किया है।
इसी मांग को लेकर छात्र संगठन सरकार के सामने कई मुद्दे रख रहे हैं। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से कई परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मंच ने TDPL एजेंसी से जुड़ी JPSC की कई परीक्षाओं की जांच और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा JSSC CGL, PGT और ACF जैसी परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों की मांग है कि जिन मामलों में गड़बड़ी के आरोप हैं, उनकी जांच कराई जाए और जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
छात्र यह भी चाहते हैं कि परीक्षा व्यवस्था में आउटसोर्सिंग कम या खत्म की जाए और परीक्षा कराने की जिम्मेदारी संबंधित आयोग के पास रहे। इसके अलावा परीक्षा के बाद कटऑफ, स्कोर कार्ड और नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। छात्रों का कहना है कि जब परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं तो उन्हें यह पता होना चाहिए कि मेरिट किस आधार पर तैयार की गई है।
आयु सीमा को लेकर भी छात्रों की मांग है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का नुकसान अभ्यर्थियों को नहीं होना चाहिए। इसी वजह से JPSC और JSSC की आयु सीमा को लेकर भी बदलाव की मांग सामने आई है।
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अब सरकार की बात करें तो सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है। पिछले दिनों भी सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ऐसा फैसला सामने नहीं आया जिससे आंदोलन खत्म हो सके।
अब 9 अगस्त को सरकार ने आंदोलन में शामिल अलग-अलग छात्र समूहों से अलग-अलग बातचीत करने का फैसला किया है। देवेंद्र महतो गुट, JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच, कोर स्टूडेंट ग्रुप और दूसरे छात्र संगठनों के प्रतिनिधि सरकार के मंत्रियों के पैनल से बातचीत करेंगे। इसके लिए रांची के मोहराबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक का कार्यक्रम रखा गया है।
सरकार का मानना है कि अलग-अलग छात्र समूहों की अपनी-अपनी मांगें हैं, इसलिए सभी की बात अलग-अलग सुनकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। लेकिन छात्रों के बीच इस तरीके को लेकर भी सवाल हैं। आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को सभी छात्र प्रतिनिधियों के साथ एक साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि कोई भ्रम न रहे। यानी फिलहाल बातचीत का रास्ता तो खुला है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी दिखाई देती है।
इस पूरे आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्र महतो भी लगातार चर्चा में हैं। वे अपनी मांगों को लेकर अनशन पर हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई। इससे आंदोलन को लेकर सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव और बढ़ गया है।
अब सवाल है कि सरकार के लिए रास्ता क्या है? सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि छात्रों की शिकायतों का समाधान भी हो और भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित न हो। क्योंकि किसी परीक्षा को रद्द करने का असर सिर्फ एक छात्र पर नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ता है। जिन छात्रों ने परीक्षा की तैयारी की, परीक्षा दी और परिणाम का इंतजार किया, उनके लिए दोबारा परीक्षा कराना भी एक बड़ी परेशानी हो सकती है। लेकिन अगर जांच में किसी परीक्षा में गंभीर गड़बड़ी साबित होती है, तो उस पर कार्रवाई करना भी जरूरी है। यही वजह है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच सबसे अहम मुद्दा बन जाती है। छात्र चाहते हैं कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे। उन्हें समयसीमा चाहिए और यह भी चाहिए कि जांच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
दूसरी तरफ सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह ऐसी व्यवस्था तैयार करे जिससे आने वाली परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में भरोसा पैदा हो। क्योंकि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाला छात्र कई साल तक मेहनत करता है। एक परीक्षा में देरी का मतलब कई बार उसकी पूरी तैयारी और करियर की योजना प्रभावित होना है। यही कारण है कि रांची में चल रहा यह आंदोलन सिर्फ किसी एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया है। अब यह परीक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में भरोसे का सवाल बन गया है।
छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च का भी ऐलान किया है। आंदोलन से जुड़े छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च में शामिल होने की अपील की है। यानी अगर आज की बातचीत में कोई ठोस रास्ता नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे और बड़ा हो सकता है। अब सबकी नजर आज की बातचीत पर है। अगर सरकार छात्रों की कुछ प्रमुख मांगों पर स्पष्ट फैसला करती है, कुछ मामलों में जांच की समयसीमा तय करती है और भर्ती व्यवस्था में सुधार का रोडमैप देती है, तो आंदोलन को खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर बातचीत सिर्फ आश्वासन तक सीमित रही, तो छात्रों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है।
यहां एक बात साफ है कि इस पूरे मामले में आरोप और जांच में साबित तथ्य को अलग-अलग देखना जरूरी है। जिन परीक्षाओं को लेकर छात्र सवाल उठा रहे हैं, उनमें अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन छात्रों की चिंता को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि मामला सीधे उनके भविष्य से जुड़ा है।
अब आने वाले दिनों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी। पहली सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का नतीजा क्या निकलता है। दूसरी, जिन परीक्षाओं को लेकर शिकायतें हैं, उनकी जांच और कार्रवाई किस तरीके से आगे बढ़ती है। और तीसरी, क्या आने वाली भर्ती परीक्षाओं के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाती है जिससे छात्रों को दोबारा इस तरह आंदोलन करने की जरूरत न पड़े।
फिलहाल सरकार बातचीत कर रही है और छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं। आंदोलन 16वें दिन में पहुंच चुका है और 10 अगस्त का विधानसभा मार्च भी तय है।
अब देखना होगा कि बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश करता है। क्योंकि अंत में यह सिर्फ JPSC या JSSC का मामला नहीं है। यह उन हजारों युवाओं के भरोसे का सवाल है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी में अपनी मेहनत, समय और पैसा लगा रहे हैं। उनकी मांग सीधी है, परीक्षा निष्पक्ष हो, प्रक्रिया पारदर्शी हो और भर्ती समय पर पूरी हो।
अब सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि रांची में पिछले 16 दिनों से चल रहा यह आंदोलन खत्म होने की ओर जाता है या फिर आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।
Location : New Delhi
Published : 10 August 2026, 8:44 AM IST