
जिला बाल संरक्षण कार्यालय
Deoghar: देशभर में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन समाज और सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का संकल्प लिया जाता हैं।
लेकिन झारखंड के देवघर जिले की हकीकत इस संकल्प पर गंभीर सवाल खड़े करती है। महिला सशक्तिकरण की बातों के बीच यहां बाल विवाह की कुप्रथा अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है।
संथाल परगना के महत्वपूर्ण जिले देवघर में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार बाल विवाह के मामलों में देवघर पूरे झारखंड में दूसरे स्थान पर है। यह स्थिति प्रशासन के साथ-साथ समाज की जागरूकता पर भी सवाल खड़ा करती है।
देवघर की जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमारी रंजना ने बताया कि राज्य में देवघर का स्थान बाल विवाह के मामलों में दूसरा है, लेकिन इस कुरीति को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 49 प्रतिशत मामले बाल विवाह की श्रेणी में आते हैं, जो निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि देवघर और मधुपुर अनुमंडल में बाल विवाह रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, ग्राम प्रधान, मुखिया और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर सकें।
साथ ही सभी प्रखंडों के सीडीपीओ, बीडीओ और महिला पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत हस्तक्षेप कर कार्रवाई करें।
जिला बाल संरक्षण इकाई के अनुसार जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 20 से 25 बाल विवाह के मामलों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। हाल ही में देवघर के ठाड़ी मोहल्ले में भी प्रशासन ने हस्तक्षेप कर एक बाल विवाह रुकवाया था।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ वर्ष में बाल मजदूरी, खोया-पाया और बाल विवाह से जुड़े करीब 150 मामले दर्ज किए गए, जिनमें आधे से अधिक मामले बाल विवाह से जुड़े हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई जगहों पर बाल विवाह खुलेआम कराए जाते हैं। जानकारी के अभाव और सामाजिक दबाव के कारण लोग इसे परंपरा की तरह स्वीकार कर लेते हैं, जबकि कम उम्र में शादी लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डालती है।
स्पष्ट है कि केवल सरकारी प्रयासों से यह कुरीति खत्म नहीं होगी। इसके लिए समाज को भी आगे आना होगा।
महिला सशक्तिकरण की असली शुरुआत तभी होगी, जब बेटियों को बचपन जीने और शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा, न कि कम उम्र में शादी की बेड़ियों में बांध दिया जाएगा।
Location : Jharkhand
Published : 8 March 2026, 1:50 PM IST
Topics : Child Marriage Deoghar Jharkhand Womens day