
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: दिल्ली पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी और खरीद-फरोख्त करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की जांच में एक और बच्चे को बरामद किया है। पुलिस ने ऋषिकेश में छापेमारी कर 32 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि महिला को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसे दिया गया बच्चा उसका अपना नहीं, बल्कि खरीदा हुआ था।
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह निःसंतान दंपतियों को आईवीएफ तकनीक और किराये की कोख (सरोगेसी) का झांसा देकर बच्चों की व्यवस्था करता था। दंपतियों से करीब नौ महीने तक इलाज और आईवीएफ प्रक्रिया के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। इसके बाद खरीदा गया बच्चा दंपति का अपना बच्चा बताकर सौंप दिया जाता था।
सोमवार को ऋषिकेश से बरामद मामले में गिरफ्तार महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी को 12 साल हो चुके हैं। शादी के कुछ समय बाद उसके पति को पैरालिसिस हो गया था। परिवार बच्चे की चाहत में परेशान था। इसी दौरान एक रिश्तेदार ने उसे डॉ विवेकी के बारे में जानकारी दी।
महिला अपने परिवार के साथ डॉ विवेकी से मिली। आरोप है कि डॉक्टर ने आईवीएफ तकनीक के जरिए बच्चा होने का भरोसा दिलाया। इसके बाद करीब नौ महीने तक महिला और उसके पति को इलाज के नाम पर अस्पताल बुलाया जाता रहा। उन्हें बताया गया कि किराये की कोख में उनका बच्चा पल रहा है।
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पुलिस के अनुसार, 4 जून को कागजी प्रक्रिया पूरी कर महिला को खरीदा हुआ नवजात उसका अपना बच्चा बताकर सौंप दिया गया। जब पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई की तो महिला को पूरी सच्चाई का पता चला। उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इससे पहले पुलिस ने शनिवार को रोहिणी में छापेमारी कर गरिमा जैन (37) और उसके ससुर सतीश जैन (70) को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से एक खरीदा गया नवजात बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, गरिमा के पति प्रवेश जैन की तलाश जारी है।
जांच में पता चला कि इन लोगों ने डॉ. विवेकी से 9.30 लाख रुपये में बच्चा खरीदा था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को भी अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मध्य जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक सात बच्चों को बरामद किया जा चुका है और 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी सहित अन्य लोग शामिल हैं।
पुलिस जांच में बिहार, आगरा, दिल्ली-एनसीआर समेत कई क्षेत्रों में बेचे गए बच्चों का पता लगाया गया है। 18 जून को मध्य जिला के स्पेशल स्टाफ ने इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया था। उस कार्रवाई में पांच नवजात बच्चों को बरामद किया गया था और 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
जांच में सामने आया कि गिरोह पिछले डेढ़ साल से सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों में करीब 30 बच्चों को बेच चुका था। आरोपियों पर गरीब परिवारों से बच्चों को कम पैसों में खरीदने और निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से 10 से 15 हजार रुपये में बच्चे खरीदते थे और उन्हें 5 से 10 लाख रुपये तक में बेच देते थे। गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक जुड़े होने की बात सामने आई है।
जांच में यह भी पता चला है कि प्रतिभा नाम की महिला गिरोह में अहम भूमिका निभाती थी। वह ऐसे दंपतियों की तलाश करती थी, जिनके यहां बच्चे नहीं हो रहे थे। इसके अलावा ऐसे परिवारों से भी संपर्क किया जाता था, जहां पहले से बेटियां थीं और आर्थिक स्थिति कमजोर थी।
अस्पताल और आईवीएफ सेंटरों के संपर्क के जरिए इन परिवारों तक पहुंच बनाई जाती थी। उन्हें तीन-चार दिन के नवजात बच्चे को पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत देने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बदले दंपतियों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और बेचे गए बच्चों की तलाश में जुटी है।
Location : New Delhi
Published : 24 June 2026, 10:34 AM IST