LPG Import Crisis: पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत का बड़ा गेम प्लान! क्या टल जाएगा रसोई का संकट?

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने एलपीजी आयात के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाकर अमेरिका और ईरान जैसे नए स्रोतों को अपनाया है। अब कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर एक-तिहाई हो गई है। वैश्विक कीमतें 46% बढ़ने के बावजूद घरेलू एलपीजी दामों में सिर्फ 10% की बढ़ोतरी की गई है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 June 2026, 8:29 AM IST

New Delhi: पश्चिमी एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए एलपीजी (LPG) आयात के स्रोतों में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव किया है। पहले भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात केवल खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) से करता था। लेकिन आपूर्ति में किसी भी संभावित रुकावट या जोखिम को कम करने के लिए भारत ने अब अमेरिका और ईरान जैसे देशों की तरफ अपनी निर्भरता तेजी से बढ़ाई है।

अमेरिका बना नया संकटमोचक

इस रणनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका को मिला है। फरवरी 2026 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी महज 8 फीसदी थी, जो अप्रैल 2026 तक रिकॉर्ड स्तर पर बढ़कर एक-तिहाई (लगभग 33%) हो गई है। यह अभूतपूर्व बदलाव साल 2025 के अंत में अमेरिका के साथ हुए सालाना 22 लाख टन एलपीजी आपूर्ति के दीर्घकालिक समझौते के कारण संभव हो सका है। इसके अलावा भारत अब ईरान (6% हिस्सेदारी), अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे नए बाजारों से भी गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है, हालांकि लंबे समुद्री रूट के कारण माल ढुलाई (फ्रेट कॉस्ट) का खर्च काफी बढ़ गया है।

ग्लोबल मार्केट में लगी आग

वैश्विक स्तर पर सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (जो भारतीय आयात का मुख्य बेंचमार्क है) में फरवरी से जून के बीच 46 प्रतिशत का भारी उछाल आया। इसके बावजूद देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आम उपभोक्ताओं को झटका न देते हुए घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में केवल 10 फीसदी की बढ़ोतरी की। इसके विपरीत, वाणिज्यिक (कमर्शियल) और औद्योगिक सिलिंडरों के दाम 79 फीसदी से अधिक बढ़ा दिए गए, जिसके कारण देश में एलपीजी की कुल खपत में बड़ी गिरावट देखी गई है। अप्रैल में एलपीजी की खपत घटकर 24.7 लाख टन रह गई, जो फरवरी में 32 लाख टन थी।

तेल कंपनियों पर टूटा दुखों का पहाड़

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतों और घरेलू स्तर पर कम दाम में गैस बेचने के कारण सरकारी तेल कंपनियों का घाटा (अंडर-रिकवरी) आसमान छूने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले मई के महीने में दिल्ली में प्रति घरेलू सिलिंडर पर कंपनियों को 651 रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, मार्च से मई के बीच महज तीन महीनों के भीतर ही खुदरा गैस विक्रेताओं को कुल 22,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय घाटा झेलना पड़ा है।

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घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर टास्क फोर्स

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, विदेशी निर्भरता और बढ़ते माल ढुलाई खर्च को कम करने के लिए सरकार देश के भीतर ही एलपीजी के घरेलू उत्पादन को 15% तक बढ़ाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है, जो रिफाइनरियों की क्षमता विस्तार पर काम करेगी।

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रणनीतिक गैस रिजर्व (Strategic Gas Reserve) की योजना

पश्चिम एशिया के अनिश्चित हालातों को देखते हुए भारत सरकार अब कच्चे तेल की तर्ज पर देश के तटीय इलाकों में 'स्ट्रैटेजिक एलपीजी रिजर्व' बनाने पर विचार कर रही है, ताकि आपातकाल की स्थिति में कम से कम 45 दिनों का गैस स्टॉक सुरक्षित रखा जा सके।

Location :  New Delhi

Published :  21 June 2026, 8:29 AM IST