
महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक (Img: Pinterest)
New Delhi: ब्रिटिश शासन के दौरान प्रेस पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं, लेकिन इसके बावजूद अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से जनता को जागरूक किया। पत्रकारिता उस दौर में केवल खबरें देने का माध्यम नहीं थी, बल्कि आजादी के आंदोलन को मजबूत करने का एक प्रभावी साधन भी थी।
महात्मा गांधी ने यंग इंडिया, नवजीवन, हरिजन और इंडियन ओपिनियन जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया। इन प्रकाशनों के माध्यम से उन्होंने सत्य, अहिंसा, स्वराज और सामाजिक सुधारों का संदेश देशभर में पहुंचाया।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने मराठी समाचार पत्र केसरी और अंग्रेजी साप्ताहिक द मराठा (Mahratta) की स्थापना की। इन पत्रों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनमत तैयार करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिंदी पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभ गणेश शंकर विद्यार्थी ने प्रताप समाचार पत्र की स्थापना की। उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया तथा स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने भूमिगत कांग्रेस रेडियो का संचालन किया। जब अंग्रेजों ने प्रेस पर नियंत्रण बढ़ा दिया था, तब इस रेडियो के जरिए बिना सेंसर की गई खबरें और स्वतंत्रता आंदोलन के संदेश लोगों तक पहुंचाए गए।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कहा गया है कि जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पत्रकार आजादी के योद्धा थे, उसी तरह आज भी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। पत्रकारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला माना जाता है।
Location : New Delhi
Published : 13 August 2026, 3:23 PM IST
Topics : Harijan Newspaper Gandhi Independence Day 2026 Mahatma Gandhi National News Press Freedom in India