प्रॉपर्टी बेच कर 47.54 लाख रुपये कैश लेना पड़ा भारी, टैक्स भरने के बाद भी आया नोटिस, ITAT से मिली बड़ी राहत

ओडिशा के गंजाम जिले में एक व्यक्ति ने दो प्रॉपर्टी बेचकर 47.54 लाख रुपये कैश में लिए और कैपिटल गेन टैक्स भी चुकाया। इसके बावजूद इनकम टैक्स विभाग ने कार्रवाई कर दी गई। इनकम टैक्स विभाग के असेसिंग ऑफिसर ने कैश में रकम लेने पर धारा 269SS के उल्लंघन का मामला माना।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 8 November 2026, 4:39 PM IST

Bhubaneswar: ओडिशा के गंजाम जिले से एक खबर सामने आ रही है, जहां एक व्यक्ति ने दो प्रॉपर्टी बेचकर 47.54 लाख रुपये कैश में लिए और कैपिटल गेन टैक्स भी चुकाया। इसके बावजूद इनकम टैक्स विभाग ने कार्रवाई करते हुए उस व्यक्ति पर पेनल्टी लगाई, जिसे आईटीएटी कटक ने गलत धारा के इस्तेमाल के कारण रद्द कर दिया।

ट्रिब्यूनल (ITAT), कटक ने पुरुषोत्तम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पेनल्टी रद्द कर दी।(IMG- PINTEREST)

आपको बता दें कि पुरुषोत्तम ने अपनी दो प्रॉपर्टी करीब 47.54 लाख रुपये में बेची थीं, जिसकी पूरी रकम कैश में ली थी। उन्होंने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में इस बिक्री की जानकारी दी और कैपिटल गेन टैक्स भी चुकाया। इसके बावजूद इनकम टैक्स विभाग ने उन पर पेनल्टी लगा दी। हालांकि, इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), कटक ने पुरुषोत्तम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पेनल्टी रद्द कर दी।

दरअसल, इनकम टैक्स विभाग के असेसिंग ऑफिसर ने कैश में रकम लेने पर धारा 269SS के उल्लंघन का मामला माना और धारा 271D के तहत पेनल्टी लगा दी। पुरुषोत्तम ने पहले CIT(A) में अपील की, लेकिन वहां राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने ITAT का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पुरुषोत्तम को रकम प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी होने के बाद मिली थी, न कि एडवांस के तौर पर। ऐसे मामले में धारा 269SS लागू नहीं होती। इसके बजाय धारा 269ST प्रासंगिक है, जिसके उल्लंघन पर धारा 271DA के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए धारा 271D के तहत लगाई गई पेनल्टी गलत थी और उसे रद्द कर दिया गया।

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बता दें कि धारा 271D के तहत धारा 269SS का उल्लंघन करने पर कैश में ली गई रकम के बराबर पेनल्टी लग सकती है। हालांकि, धारा 273B के तहत उचित वजह साबित करने पर राहत मिल सकती है। प्रॉपर्टी बेचने पर बड़ी रकम कैश में लेने के बजाय बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। बिक्री समझौते, पेमेंट रसीद और खरीदार से जुड़े दस्तावेज भी सुरक्षित रखने चाहिए।

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अधिकारी ने मामले की जांच की

बेंगलुरु स्थित इनकम टैक्स विभाग के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) ने उनकी आईटीआर प्रोसेस की और कैपिटल गेन टैक्स की गणना स्वीकार कर ली। लेकिन ओडिशा के बेरहामपुर के असेसिंग ऑफिसर (AO) को जानकारी मिली कि पुरुषोत्तम ने प्रॉपर्टी की बिक्री की पूरी रकम कैश में ली है। इसके बाद अधिकारी ने मामले की जांच की और पाया कि पुरुषोत्तम ने प्रॉपर्टी बेचने के बदले कैश स्वीकार किया था। एओ ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269SS के साथ धारा 271D और 273D के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की। इसके बाद पुरुषोत्तम पर पेनल्टी लगा दी गई।

ITAT से मिली राहत 

इनकम टैक्स विभाग की पेनल्टी के खिलाफ पुरुषोत्तम ने कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) यानी CIT(A) के सामने अपील की। हालांकि, वहां उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने आईटीएटी कटक में अपील की। इस मामले में अहम बात यह थी कि पुरुषोत्तम को मिली रकम प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी होने के बाद मिली थी। यह रकम बिक्री से पहले लिया गया एडवांस नहीं थी। ट्रिब्यूनल ने माना कि ऐसे लेनदेन पर धारा 269SS लागू नहीं होती। इसके बजाय इस तरह के कैश लेनदेन के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269ST प्रासंगिक थी। धारा 269ST के उल्लंघन पर पेनल्टी का प्रावधान धारा 271DA में है।

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वहीं आईटीएटी ने कहा कि असेसिंग ऑफिसर को धारा 269ST के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने धारा 269SS लागू कर दी। इसलिए धारा 271D के तहत लगाई गई पेनल्टी को रद्द कर दिया गया।

Location :  Bhubaneshwar

Published :  8 November 2026, 4:39 PM IST