अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत में एलपीजी गैस सप्लाई पर भी पड़ा है। कई राज्यों में गैस सिलेंडरों की किल्लत, लंबी कतारें और कालाबाज़ारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। होटल-रेस्टोरेंट भी गैस की जगह इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं।

एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत (Symbolic Photo)
New Delhi: अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत देखने को मिल रही है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि कुछ जगहों पर कालाबाज़ारी भी तेज हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि 1000 रुपये में मिलने वाला घरेलू सिलेंडर कई जगहों पर 1800 रुपये तक बेचा जा रहा है।
देश के अलग-अलग राज्यों से गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी की खबरें सामने आ रही हैं। बिहार के कई शहरों में 1000 रुपये का घरेलू एलपीजी सिलेंडर करीब 1800 रुपये तक बेचा जा रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां करीब 1900 रुपये का कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 4000 रुपये तक में बिकने की शिकायतें मिल रही हैं।
कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने के बाद होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर होटल और ढाबा संचालकों ने गैस की जगह इंडक्शन चूल्हों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। इसका असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दुकानों पर इनकी बिक्री में अचानक उछाल देखा जा रहा है।
जयपुर के जयंती बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता के मुताबिक पहले जयपुर में हर महीने करीब 2500 से 3000 इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, लेकिन अब गैस संकट के चलते इनकी मांग में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। बाजार में कई दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन खरीदने पहुंच रहे हैं, जिससे गैस की कमी के बीच खाना बनाने में दिक्कत न हो।
महराजगंज में बदला गैस सिलेंडर देने का नियम, जानिये क्या हुआ बड़ा बदलाव?
गैस की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सिलेंडर बुकिंग के नियम में बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर कम से कम 45 दिन बाद ही मिलेगा।