ऑनलाइन गेमिंग और चाइल्ड पोर्नोग्राफी का बढ़ता खतरा गंभीर चिंता का विषय, सशक्त कानूनी ढांचे की जरूरत: डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़

भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़ ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल लेक्चर में “टेक्नोलॉजी के युग में सार्वजनिक जीवन की नैतिकता” विषय पर बतौर मुख्य अतिथि एक महत्वपूर्ण बात कही है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 26 April 2026, 11:07 PM IST

New Delhi: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से उत्पन्न हो रहे खतरों पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि ऑनलाइन गेमिंग के दुरुपयोग और डिजिटल स्पेस में बच्चों के शोषण के बढ़ते खतरे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, वह राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल लेक्चर के 32वें संस्करण में मुख्य अतिथि के रूप में “टेक्नोलॉजी के युग में सार्वजनिक जीवन की नैतिकता” विषय पर एक विशिष्ट सभा को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. चंद्रचूड़ ने अनियंत्रित डिजिटल कंटेंट के गहरे सामाजिक प्रभाव पर जोर देते हुए पोर्नोग्राफी के प्रसार और डीपफेक जैसे उभरते खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति ने कंटेंट को लोगों के निजी जीवन तक गहराई से पहुंचा दिया है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में एक ऐसा उद्योग मौजूद है जिसने वह कर दिखाया है जो कोई आक्रमणकारी सेना नहीं कर पाई—यह हर घर, हर फोन और हर किशोर के कमरे तक पहुंच चुका है और वह भी कानूनी रूप से,” यह टिप्पणी उन्होंने पोर्नोग्राफिक कंटेंट के तेजी से फैलाव के संदर्भ में की।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हो रहे दुरुपयोग के खतरों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं पोर्नोग्राफी की बात कर रहा हूं और उसके सबसे खतरनाक रूप—डीपफेक—की, जिसमें एआई के जरिए किसी वास्तविक महिला, अक्सर स्कूली छात्रा, के चेहरे को बिना उसकी जानकारी के अश्लील दृश्यों में जोड़ दिया जाता है।”

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एक चिंताजनक उदाहरण देते हुए उन्होंने सितंबर 2023 में अलमेंद्रालेजो में हुई घटना का उल्लेख किया, जहां 11 साल तक की उम्र की 20 से अधिक स्कूली छात्राएं डीपफेक पोर्नोग्राफिक तस्वीरों की शिकार बनीं, जिन्हें कथित तौर पर उनके ही सहपाठियों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा ये तस्वीरें इतनी तेजी से फैलीं कि लड़कियों के नाश्ता खत्म करने से पहले ही पूरे शहर के फोन तक पहुंच गईं,” जिससे ऐसे कंटेंट के प्रसार की गति और व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा कि इस तरह की घटनाएं तकनीकी प्रगति और कानूनी तैयारी के बीच मौजूद खाई को उजागर करती हैं। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा, नैतिक जवाबदेही और डिजिटल इकोसिस्टम में मजबूत नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

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उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन सुरक्षा, गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग और एआई-आधारित कंटेंट मैनिपुलेशन के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है, जो मौजूदा कानूनी और नीतिगत ढांचों के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  26 April 2026, 7:14 PM IST