
वीरों की शहादत को 169 साल बाद भी सलाम (Img: Google)
Deoghar: झारखंड के देवघर जिले के रोहिणी क्षेत्र में 16 जून को शहादत दिवस के अवसर पर अमर शहीद अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून को श्रद्धांजलि दी गई। यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदान को याद करने का भावपूर्ण अवसर था।
इतिहास के अनुसार, जब देश में 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था, तब संताल परगना क्षेत्र का रोहिणी भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ उठ खड़ा हुआ था। यहां के तीन वीर सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और विद्रोह की मशाल जलाई।
विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजी प्रशासन ने अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून को गिरफ्तार कर लिया। 16 जून 1857 को रोहिणी में ही सार्वजनिक रूप से फांसी देकर उन्हें शहीद कर दिया गया। उनकी शहादत ने क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन को और अधिक मजबूत किया।
हर वर्ष 16 जून को रोहिणी में शहादत दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। माल्यार्पण और स्मरण कार्यक्रम के माध्यम से उनके बलिदान को याद किया जाता है।
आज रोहिणी एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र उन स्थानों में शामिल है जहां ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती विद्रोह की आवाज उठी थी।
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इन शहीदों की गाथा को स्कूलों और संस्थानों में अधिक विस्तार से पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।
देवघर केवल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यह शौर्य, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को भी संजोए हुए है। रोहिणी के तीन वीरों की शहादत इसका जीवंत प्रमाण है।
Location : Deoghar
Published : 16 June 2026, 3:41 PM IST