Deoghar Fraud: हेलो मैम… Flipkart कस्टमर केयर बनकर करती थी ठगी, मिनटों में उड़ाती थी पैसे
यह मामला सिर्फ एक महिला की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि उस बदलते अपराध तंत्र की तस्वीर भी है जिसमें मोबाइल फोन ही हथियार है और इंटरनेट उसका मैदान। चिंता की बात यह है कि अब अपराधी किसी जंगल या गैंगस्टर अड्डे में नहीं, बल्कि आम घरों और सामान्य चेहरों के पीछे छिपे बैठे हैं।
Deoghar: धार्मिक नगरी के रूप में देशभर में पहचान रखने वाला देवघर अब धीरे-धीरे साइबर अपराध के नए नक्शे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराता दिखाई दे रहा है। सीमावर्ती जिला जामताड़ा पहले से ही देशभर में साइबर ठगी के लिए बदनाम रहा है, लेकिन अब देवघर में भी ऐसे नेटवर्कों की सक्रियता लगातार चिंता बढ़ा रही है। ताज़ा मामले में एक महिला साइबर अपराधी की गिरफ्तारी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि साइबर ठगी का जाल अब केवल पुरुष गिरोहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाएं भी इस संगठित अपराध का हिस्सा बनती जा रही हैं। (Img: Dyanmite News)
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देवघर पुलिस की कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार की गई महिला पर आरोप है कि वह खुद को कभी Flipkart और Amazon का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेती थी, तो कभी Airtel Payment Bank अधिकारी बनकर उपभोक्ताओं की निजी बैंकिंग जानकारी हासिल करती थी। इतना ही नहीं, Google पर फर्जी PhonePe कस्टमर केयर नंबर अपलोड कर भोले-भाले लोगों को कॉल करवाना और फिर उन्हें ऑनलाइन ट्रैप में फंसाकर पैसे उड़ाना भी उसके नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगी का तरीका बेहद शातिराना था। उपभोक्ताओं को “कैशबैक”, “KYC अपडेट”, “कार्ड बंद होने”, “अकाउंट ब्लॉक” या “रिवॉर्ड प्वाइंट” जैसे बहानों से डराया और लालच दिया जाता था। इसके बाद उन्हें PhonePe Gift Card बनाने या Airtel Thanks App के जरिए कुछ प्रक्रिया पूरी करने को कहा जाता था। जैसे ही उपभोक्ता निर्देशों का पालन करता, उसके खाते से रकम साफ कर दी जाती थी। (Img: Dyanmite News)
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पुलिस की गिरफ्त में आई महिला की पहचान रूबी कुमारी के रूप में हुई है, जो देवघर जिले के पथरौल थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में बरामद डिजिटल उपकरणों से साइबर ठगी के कई अहम सुराग मिलने की बात सामने आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि आरोपी महिला पर इससे पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर उसकी गतिविधियों को लेकर किसी को ज्यादा शक भी नहीं हुआ। लेकिन साइबर अपराध की दुनिया में यही सबसे खतरनाक पहलू माना जा रहा है.!(Img: Dyanmite News)
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विशेषज्ञ मानते हैं कि जामताड़ा मॉडल की साइबर ठगी अब आसपास के जिलों में तेजी से फैल चुकी है। इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग ने अपराधियों को नया हथियार दे दिया है। गांवों और कस्बों तक फैले मोबाइल नेटवर्क के बीच बेरोजगारी, तेज कमाई की लालसा और डिजिटल जागरूकता की कमी ऐसे अपराधों को हवा दे रही है। देवघर में पिछले कुछ समय से लगातार साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे गिरोहों का सक्रिय रहना कई सवाल भी खड़े करता है। आखिर फर्जी कस्टमर केयर नंबर Google तक कैसे पहुंच रहे हैं? आखिर आम लोग बार-बार एक ही तरह की ठगी का शिकार क्यों हो रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या साइबर अपराध अब छोटे शहरों की नई “अंडरग्राउंड इंडस्ट्री” बनता जा रहा है? (Img: Dyanmite News)
Deoghar: धार्मिक नगरी के रूप में देशभर में पहचान रखने वाला देवघर अब धीरे-धीरे साइबर अपराध के नए नक्शे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराता दिखाई दे रहा है। सीमावर्ती जिला जामताड़ा पहले से ही देशभर में साइबर ठगी के लिए बदनाम रहा है, लेकिन अब देवघर में भी ऐसे नेटवर्कों की सक्रियता लगातार चिंता बढ़ा रही है। ताज़ा मामले में एक महिला साइबर अपराधी की गिरफ्तारी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि साइबर ठगी का जाल अब केवल पुरुष गिरोहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाएं भी इस संगठित अपराध का हिस्सा बनती जा रही हैं। (Img: Dyanmite News)
देवघर पुलिस की कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार की गई महिला पर आरोप है कि वह खुद को कभी Flipkart और Amazon का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेती थी, तो कभी Airtel Payment Bank अधिकारी बनकर उपभोक्ताओं की निजी बैंकिंग जानकारी हासिल करती थी। इतना ही नहीं, Google पर फर्जी PhonePe कस्टमर केयर नंबर अपलोड कर भोले-भाले लोगों को कॉल करवाना और फिर उन्हें ऑनलाइन ट्रैप में फंसाकर पैसे उड़ाना भी उसके नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगी का तरीका बेहद शातिराना था। उपभोक्ताओं को “कैशबैक”, “KYC अपडेट”, “कार्ड बंद होने”, “अकाउंट ब्लॉक” या “रिवॉर्ड प्वाइंट” जैसे बहानों से डराया और लालच दिया जाता था। इसके बाद उन्हें PhonePe Gift Card बनाने या Airtel Thanks App के जरिए कुछ प्रक्रिया पूरी करने को कहा जाता था। जैसे ही उपभोक्ता निर्देशों का पालन करता, उसके खाते से रकम साफ कर दी जाती थी। (Img: Dyanmite News)
पुलिस की गिरफ्त में आई महिला की पहचान रूबी कुमारी के रूप में हुई है, जो देवघर जिले के पथरौल थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में बरामद डिजिटल उपकरणों से साइबर ठगी के कई अहम सुराग मिलने की बात सामने आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि आरोपी महिला पर इससे पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर उसकी गतिविधियों को लेकर किसी को ज्यादा शक भी नहीं हुआ। लेकिन साइबर अपराध की दुनिया में यही सबसे खतरनाक पहलू माना जा रहा है.!(Img: Dyanmite News)
विशेषज्ञ मानते हैं कि जामताड़ा मॉडल की साइबर ठगी अब आसपास के जिलों में तेजी से फैल चुकी है। इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग ने अपराधियों को नया हथियार दे दिया है। गांवों और कस्बों तक फैले मोबाइल नेटवर्क के बीच बेरोजगारी, तेज कमाई की लालसा और डिजिटल जागरूकता की कमी ऐसे अपराधों को हवा दे रही है। देवघर में पिछले कुछ समय से लगातार साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे गिरोहों का सक्रिय रहना कई सवाल भी खड़े करता है। आखिर फर्जी कस्टमर केयर नंबर Google तक कैसे पहुंच रहे हैं? आखिर आम लोग बार-बार एक ही तरह की ठगी का शिकार क्यों हो रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या साइबर अपराध अब छोटे शहरों की नई “अंडरग्राउंड इंडस्ट्री” बनता जा रहा है? (Img: Dyanmite News)