
बैद्यनाथ धाम में विश्वकर्मा की अद्भुत कारीगरी की मान्यता(IMG: Dynamite News)
Deoghar: झारखंड के देवघर जिले में आस्था, अध्यात्म और पौराणिक मान्यताओं की नगरी देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम की महिमा जितनी अद्भुत है, उतनी ही रहस्यमयी यहां की स्थापत्य कला भी है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रतिष्ठित बाबा बैद्यनाथ मंदिर और माता शक्ति पीठ की मौजूदगी इस धाम को धार्मिक दृष्टि से विशिष्ट बनाती है। लेकिन इस पूरे मंदिर परिसर में भगवान विश्वकर्मा की कथित अद्भुत कारीगरी से जुड़ी मान्यताएं भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर एक बार फिर बाबा बैद्यनाथ मंदिर की उस अनोखी स्थापत्य कला की चर्चा तेज हो गई है, जिसे श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की दिव्य शिल्पकला का प्रमाण मानते हैं।
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और निर्माण कला का अधिष्ठाता माना जाता है। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर परिसर के पांच प्रमुख मंदिरों का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया था। इनमें बाबा बैद्यनाथ मंदिर, माता शक्ति मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर समेत अन्य मंदिरों का उल्लेख किया जाता है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि सदियों बाद भी इन मंदिरों की मूल संरचना में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है। यही वजह है कि यहां की स्थापत्य शैली को लेकर आज भी लोगों में कौतूहल बना हुआ है।
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बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सबसे चर्चित मान्यताओं में गर्भगृह से जुड़े दूसरे प्रवेश द्वार का रहस्य भी शामिल है। वरिष्ठ पंडा बाबा झलक के अनुसार मंदिर के मूल स्वरूप में परिवर्तन का प्रयास कई बार किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
उनके मुताबिक, मंदिर की दीवारों पर छेनी-हथौड़ी चलाकर निर्माण अथवा दूसरा रास्ता निकालने का प्रयास किए जाने पर कई बार दीवारों से खून जैसे लाल रंग का पदार्थ निकलने जैसी घटनाएं सामने आईं। ऐसी घटनाओं के बाद निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
बताया जाता है कि मंदिर की संरचना और उसके रहस्य को समझने के लिए बाहर से विशेषज्ञ इंजीनियर भी पहुंचे। यहां तक कि लंदन से आए इंजीनियरों ने भी मंदिर की संरचना का अध्ययन किया, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के गर्भगृह से दूसरा द्वार तैयार करने का प्रयास सफल नहीं हो सका।
बाबा बैद्यनाथ धाम की स्थापत्य विशेषताओं की चर्चा केवल गर्भगृह तक सीमित नहीं है। मंदिर परिसर में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर को लेकर भी ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि इसकी संरचना आज तक पूर्ण नहीं हो सकी है।
मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे श्रद्धालु राजेश कुमार का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान विश्वकर्मा की निर्माण कला का प्रभाव आज भी स्पष्ट दिखाई देता है। उनका मानना है कि मंदिर परिसर में मौजूद कई संरचनाएं ऐसी हैं, जिन्हें सामान्य इंजीनियरिंग के नजरिए से समझना आसान नहीं है।
श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास भी है कि मंदिर की मौजूदा संरचना में किसी प्रकार का बदलाव करना आसान नहीं है और यही वजह है कि सदियों पुराना स्वरूप आज भी काफी हद तक कायम है।
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मंदिर प्रभारी कमलेश कुमार बताते हैं कि विश्वकर्मा पूजा के दिन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक तैयारियां की जाती हैं।
उनका कहना है कि मंदिर की मूल संरचना और भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए यहां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा की व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं। कई अवसरों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त निर्माण या बदलाव पर विचार किया गया, लेकिन मंदिर की मूल संरचना को देखते हुए कई प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सके।
देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि अपने भीतर सदियों पुरानी स्थापत्य परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं को भी समेटे हुए है। भगवान विश्वकर्मा को समर्पित विश्वकर्मा पूजा के दिन इस धाम की निर्माण कला और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएं एक बार फिर चर्चा में आ जाती हैं।
भक्तों के लिए मंदिर की हर दीवार, हर शिखर और हर संरचना आस्था का विषय है। वहीं इंजीनियरिंग और स्थापत्य के नजरिए से भी इसकी संरचना कई सवाल खड़े करती है। यही आस्था, रहस्य और प्राचीन स्थापत्य का संगम बाबा बैद्यनाथ धाम को देश के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है।
Location : Deoghar
Published : 17 September 2026, 2:13 PM IST