देवघर में अढ़हिया मेले का आगाज: खेतों से बाबा के दरबार तक पहुंची आस्था, जानिए क्यों खास है ढाई दिन का यह मेला

देवघर में अढ़हिया मेले का आगाज हो चुका है और बिहार समेत कई इलाकों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस मेले की खास कड़ी खेती-किसानी से जुड़ी है। धान की रोपनी और जरूरी कृषि कार्यों के बाद किसान परिवार बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचकर दर्शन करते हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 26 September 2026, 2:03 PM IST

Deoghar: बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में अढ़हिया मेले का आगाज हो चुका है। ढाई दिन चलने वाला यह मेला सिर्फ पूजा-पाठ और दर्शन का आयोजन नहीं है, बल्कि इसके साथ ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और लोकपरंपरा की गहरी कड़ी जुड़ी है। मेले में बिहार समेत आसपास के इलाकों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

खेती का काम पूरा होते ही बाबा के दरबार में हाजिरी

अढ़हिया मेले की खास पहचान खेती-किसानी से जुड़ी परंपरा है। बारिश के मौसम में किसान धान की रोपनी और दूसरे कृषि कार्यों में व्यस्त रहते हैं। खेती का महत्वपूर्ण काम अंतिम पड़ाव पर पहुंचने के बाद किसान परिवार बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए देवघर पहुंचते हैं।

बिहार से परिवार के साथ पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि खेती-किसानी का काम पूरा होने के बाद बाबा के दर्शन करना उनके परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा है। उनके मुताबिक, यह उनके लिए सिर्फ मेला नहीं, बल्कि आस्था और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है।

डाक बम और दंडी बम भी पहुंच रहे देवघर

मेले में सामान्य श्रद्धालुओं के साथ डाक बम और दंडी बम भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले डाक बम कठिन संकल्प के साथ बाबा को जल अर्पित करते हैं।

सुल्तानगंज से देवघर की करीब 105 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचते हैं। वहीं दंडी बम दंडवत करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा आस्था और साधना का हिस्सा है।

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बिहार के कई जिलों से पहुंच रहे श्रद्धालु

अढ़हिया मेले में बिहार के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जमुई, खगड़िया, सीतामढ़ी, दरभंगा समेत कई जिलों से लोग बाबा के दर्शन के लिए देवघर आ रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान परिवार भी मेले में नजर आ रहे हैं।

लोकपरंपरा का अहम हिस्सा है अढ़हिया मेला

देवघर के वरिष्ठ पंडा ने अढ़हिया मेले को बाबाधाम की महत्वपूर्ण लोकपरंपरा का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, बाबा बैद्यनाथ की नगरी में धार्मिक परंपराएं सिर्फ श्रावणी मास तक सीमित नहीं हैं। अढ़हिया मेला भी पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और लोकविश्वास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। एसआई संजय कुमार ने बताया कि उपायुक्त के निर्देश पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा रहा है।

ढाई दिन का मेला, परंपरा सदियों पुरानी

अढ़हिया मेला भले ही ढाई दिनों का हो, लेकिन इससे जुड़ी परंपरा ग्रामीण जीवन और आस्था के लंबे सफर की तस्वीर दिखाती है। खेतों में काम पूरा करने के बाद बाबा के दरबार पहुंचते किसान परिवार, कठिन संकल्प लेकर आते डाक बम और दंडी बम और बिहार-झारखंड से जुटते श्रद्धालु इस मेले को खास बनाते हैं।

यही वजह है कि अढ़हिया मेला देवघर की धार्मिक पहचान के साथ यहां की लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन के जुड़ाव को भी सामने लाता है।

Location :  Deoghar

Published :  26 September 2026, 2:03 PM IST