
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने इस बार पहले ही कमर कस ली है। प्रदूषण बढ़ने के बाद आपातकालीन प्रतिबंध लगाने के बजाय, दिल्ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक लागू होने वाली शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था को अधिसूचित कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत वाहनों, निर्माण गतिविधियों, पार्किंग, कार्यालयों के समय और खुले में कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों पर पहले से ही कड़े नियंत्रण के उपाय तय कर दिए गए हैं। यह व्यवस्था सामान्य तौर पर हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रभावी रहेगी और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के ग्रैप (GRAP) के साथ समानांतर रूप से काम करेगी।
अब तक दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद ग्रैप के तहत अचानक पाबंदियां लागू की जाती थीं। इससे आम लोगों, व्यापारियों, उद्योगों और संस्थानों को अचानक होने वाले बदलावों के अनुसार खुद को ढालने में भारी परेशानी होती थी।
इस बार नई व्यवस्था के जरिए सरकार ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि नवंबर से फरवरी के बीच हवा की स्थिति खराब होने पर कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं। इस अग्रिम घोषणा से नागरिकों, आरडब्ल्यूए (RWA), उद्योगों, निर्माण एजेंसियों और सरकारी विभागों को मानसिक और व्यावहारिक रूप से पहले से तैयारी करने का पूरा समय मिलेगा।
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वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन (पेट्रोल/डीजल) दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) होगा। बिना वैध पीयूसी वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा।
इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-6 (Non-BS-6) वाणिज्यिक (कमर्शियल) वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, सीएनजी (CNG), इलेक्ट्रिक (EV), आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।
सर्दियों के दौरान सड़कों पर निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क (Parking Fees) को दोगुना कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, सड़कों पर यातायात के दबाव और भीड़ को घटाने के लिए चरणबद्ध कार्यालय समय (Staggered Office Timings) की व्यवस्था लागू की जा सकती है। प्रदूषण के दौरान सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति (Physical Attendance) की अनुमति होगी, जबकि बाकी के 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) का प्रावधान रखा गया है। जरूरी और आपातकालीन सेवाओं को इस नियम से बाहर रखा गया है।
दिल्ली में निर्माण और ध्वस्तीकरण (Demolition) गतिविधियों से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने परियोजना संचालकों और निर्माण एजेंसियों को अपनी योजना पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण कार्यों को सख्त पर्यावरणीय मानकों और धूल नियंत्रण उपायों के साथ ही करने की अनुमति होगी। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच (जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ने की आशंका रहती है) निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सभी बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, मिस्ट सिस्टम और अन्य धूल नियंत्रण उपायों को अनिवार्य किया जाएगा।
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ठंड के मौसम में खुले में कचरा, पत्तियां, प्लास्टिक और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए भी सख्त कार्ययोजना बनाई गई है। आरडब्ल्यूए, स्थानीय संस्थानों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सर्दियों के दौरान रात में सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों द्वारा ठंड से बचने के लिए आग जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी होंगी। इन नियमों का पालन जमीनी स्तर पर कराने के लिए फील्ड सर्विलांस (निगरानी) को मजबूत किया जाएगा और उल्लंघनकर्ताओं को पकड़ने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी की भी मदद ली जाएगी।
Location : New Delhi
Published : 19 June 2026, 2:40 PM IST
Topics : Air Quality Management delhi vehicle ban Delhi Pollution Parking Fees Doubled Winter Action Plan