
दिल्ली हादसा (Img- Dynamite News)
New Delhi: देश भर के कोने-कोने से लाखों छात्र और मजदूर एक बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर राजधानी दिल्ली का रुख करते हैं। माता-पिता अपने जिगर के टुकड़ों को इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वे सुरक्षित रहेंगे। लेकिन जब प्रशासनिक ढिलाई, अवैध निर्माण और पैसे के लालच में बनी जर्जर दीवारें ढहती हैं, तो ये सपने पल भर में मलबे के नीचे दफन हो जाते हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन की संकरी गलियों में हुआ हालिया हादसा इस बात का कड़वा सबूत है। रविवार को जब छात्र अपने पीजी में आराम कर रहे थे, तभी 30 साल पुरानी 5 मंजिला जर्जर इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह गिर गई, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई।
सत्य निकेतन की घटना को अगर कोई महज एक इत्तेफाक या कुदरती हादसा कहे, तो यह उन बेकसूरों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने अपनी जान गंवाई है। आंकड़े गवाही देते हैं कि बीते एक साल के भीतर दिल्ली में इमारतें ढहने के 6 बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें अब तक 35 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हर हादसे के बाद जांच कमेटियां बैठती हैं, वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रहती है।
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अगर पिछले 12 महीनों के पन्नों को पलटें, तो दिल्ली का हर कोना ऐसे हादसों से दहला है:
1. रोहिणी निर्माण हादसा (जुलाई 2026): एक चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जिसमें 3 बेकसूर मजदूरों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई।
2. साकेत/सैदुलाजाब हादसा (मई 2026): साकेत मेट्रो स्टेशन के पास अवैध रूप से बनी 5 मंजिला व्यावसायिक इमारत बगल की कैंटीन पर जा गिरी। इस दर्दनाक घटना में 6 लोगों की जान चली गई और 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
3. वेलकम इलाका (जुलाई 2025): उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम में एक 4 मंजिला पुरानी रिहायशी इमारत जमींदोज हो गई, जिसने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं।
4. पहाड़गंज बेसमेंट हादसा (मई 2025): तेज बारिश और आंधी के कारण निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट ढहा और 3 मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी।
5. मुस्तफाबाद की तबाही (अप्रैल 2025): अवैध रूप से बनी 4 मंजिला इमारत गिरने से एक साथ 11 लोगों की मौत हो गई थी।
ये आंकड़े साबित करते हैं कि दिल्ली में अवैध रूप से मंजिलें चढ़ाना और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर पीजी व कमर्शियल सेंटर चलाना एक सामान्य बात बन चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ये अवैध इमारतें बन रही होती हैं, जब इनमें बिना इजाजत बेसमेंट खोदे जाते हैं या क्षमता से अधिक बिस्तर लगाए जाते हैं, तब नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी कहां सो रहे होते हैं?
हर बार हादसा होने के बाद ही इमारतों को अवैध घोषित कर दिया जाता है और नोटिस बांटने की औपचारिकता पूरी की जाती है। लेकिन जब तक भ्रष्टाचार के इस चक्रव्यूह पर कड़ा प्रहार नहीं होगा और दोषी अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक दिल्ली का हर दूसरा मकान एक संभावित कब्रगाह ही बना रहेगा।
Location : New Delhi
Published : 7 September 2026, 11:21 AM IST