कमजोर रहा मानसून तो दूध के दाम में लगेगी आग? डेयरी कंपनियां कर रही दाम बढ़ाने की तैयारी!

कमजोर मानसून, बढ़ती चारे की लागत और घटती दूध उत्पादन वृद्धि के कारण देश में दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतें बढ़ने के संकेत हैं। क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में दूध समेत डेयरी उत्पादों के दाम औसतन 5 से 6 फीसदी तक बढ़ सकते हैं, जबकि डेयरी उद्योग की मांग मजबूत बनी रहेगी।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 30 June 2026, 1:16 PM IST
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New Delhi: अगर इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में आम लोगों की रसोई का बजट और बिगड़ सकता है। डेयरी कंपनियां दूध और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पशुओं के चारे की बढ़ती लागत, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के कारण दूध उत्पादन की रफ्तार का धीमा पड़ना माना जा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को दूध, दही, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

कमजोर मानसून और गर्मी से उत्पादन पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का सीधा असर पशुओं की दूध देने की क्षमता पर पड़ा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से हरे चारे की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे दूध उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में दूध उत्पादन की वृद्धि दर घटकर करीब 4 फीसदी रह सकती है, जबकि पिछले पांच वर्षों का औसत लगभग 5 फीसदी रहा है।

डेयरी कंपनियों पर बढ़ रहा लागत का दबाव

क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा देश की 37 प्रमुख डेयरी कंपनियों के विश्लेषण के अनुसार, किसानों से कच्चा दूध खरीदने की लागत लगातार बढ़ रही है। पशुओं के चारे, रखरखाव, परिवहन और अन्य परिचालन खर्चों में तेजी के कारण कंपनियों का लागत दबाव बढ़ गया है। कंपनियों का कहना है कि परिचालन लाभ को लगभग 4 फीसदी के स्तर पर बनाए रखने के लिए खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो सकता है।

दूध और डेयरी उत्पाद हो सकते हैं महंगे

क्रिसिल का अनुमान है कि आने वाले महीनों में दूध और डेयरी उत्पादों की खुदरा कीमतों में औसतन 5 से 6 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि कंपनियां एक साथ कीमतें बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ा सकती हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।

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पनीर, चीज और फ्लेवर्ड मिल्क पर ज्यादा असर

सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि पनीर, चीज, श्रीखंड, फ्लेवर्ड मिल्क और अन्य वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इन उत्पादों में लागत बढ़ने का असर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ने की संभावना है।

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मांग मजबूत, इसलिए कंपनियों को भरोसा

कीमतें बढ़ने की आशंका के बावजूद डेयरी उत्पादों की मांग में बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। दूध, घी और मक्खन जैसी आवश्यक वस्तुओं की मांग लगातार बनी हुई है। इसी वजह से चालू वित्त वर्ष में संगठित डेयरी उद्योग की वॉल्यूम ग्रोथ 8 से 10 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। मजबूत मांग के चलते डेयरी कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन भी स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  30 June 2026, 1:16 PM IST

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