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पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर को कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में हेड कॉन्स्टेबल अमित मलिक को कुछ वकीलों ने रोककर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल किए थे। इसके बाद उसी दिन दोपहर करीब 2:30 बजे अधिवक्ता अमूल्य रतन के साथ 15 से 20 वकील शाहदरा थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस पर रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ने का आरोप लगाया।
एसीपी गांधी नगर मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत के आधार पर 26 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि थाने में पहुंचे वकीलों ने एसएचओ और एसीपी के साथ बदसलूकी की, गाली-गलौज की और पुलिसकर्मियों को पीटने की धमकी दी। यह भी आरोप है कि एक वकील ने एसएचओ का हाथ पकड़कर खींचने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है और मामले की जांच जारी है।
दूसरी तरफ, वकीलों का कहना है कि विवाद की जड़ उनके साथी अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में आई गंभीर चोट और आरोपियों की गिरफ्तारी से जुड़ी है। बार समिति के मुताबिक, 23 अक्टूबर को थाने पहुंचे वकीलों को ACP और SHO ने आरोपियों की गिरफ्तारी का भरोसा दिया था। लेकिन अगले दिन उन्हें पता चला कि संदिग्धों को गिरफ्तार किए बिना छोड़ दिया गया है।
इसके बाद वकील दोबारा थाने पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने रिवॉल्वर दिखाकर वकीलों को धमकाया। वकीलों ने थाने में कथित मारपीट और पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
इस घटना के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकीलों ने आज हड़ताल पर रहने की घोषणा की है। वकीलों की एक समिति ने सोमवार को पारित प्रस्ताव में मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ACP मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित SHO को निलंबित किया जाए तथा उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
मामले में पुलिस और वकीलों के आरोप एक-दूसरे से अलग हैं। पुलिस वकीलों पर अधिकारियों से बदसलूकी और धमकी देने का आरोप लगा रही है, जबकि वकील पुलिस पर मारपीट और हथियार दिखाकर डराने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में CCTV फुटेज, दोनों पक्षों के बयान और जांच के नतीजे अहम होंगे। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
Location : New Delhi
Published : 27 October 2026, 10:00 AM IST