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14 साल की उम्र में संभाली सत्ता( Ai generated image)
New Delhi: मुगल इतिहास के सबसे चर्चित शासकों में शामिल अकबर की आज पुण्यतिथि है। 27 अक्टूबर 1605 को आगरा में उनका निधन हुआ था। अकबर ने करीब 49 वर्षों तक शासन किया और अपने साम्राज्य को मजबूत बनाने के साथ प्रशासन, कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण काम किए। इतिहास में उन्हें अकबर महान के नाम से भी जाना जाता है। उनकी जिंदगी जितनी युद्ध और राजनीति से जुड़ी थी, उतनी ही दिलचस्प उनकी पारिवारिक जिंदगी भी रही।
अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को अमरकोट में हुआ था जो आज पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है। उनके पिता हुमायूं मुगल शासक थे। 1556 में हुमायूं की मृत्यु के बाद अकबर करीब 13-14 साल की उम्र में बादशाह बने। शुरुआती वर्षों में बैरम खां ने शासन चलाने में उनकी मदद की। बाद में अकबर ने अपनी ताकत बढ़ाई और मुगल साम्राज्य का विस्तार किया।
अकबर की प्रेम और वैवाहिक जिंदगी की बात करें तो उनकी शादी आमेर के राजपूत शासक परिवार की राजकुमारी से हुई थी। उन्हें हरका बाई और मरियम-उज-जमानी जैसे नामों से जाना जाता है। लोकप्रिय फिल्मों और धारावाहिकों में उन्हें अक्सर जोधा बाई कहा जाता है, हालांकि इतिहास में इस नाम को लेकर मतभेद हैं।
1562 में हुआ यह विवाह केवल पारिवारिक रिश्ता नहीं था, बल्कि मुगलों और राजपूतों के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम था। इस रिश्ते से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक सहयोग बढ़ा। मरियम-उज-जमानी ने आगे चलकर मुगल दरबार में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। उनके बेटे सलीम आगे चलकर जहांगीर के नाम से बादशाह बने। अकबर की अन्य प्रमुख पत्नियों में रुकैया सुल्तान बेगम और सलीमा सुल्तान बेगम भी शामिल थीं। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी कई लोकप्रिय कहानियों के मुकाबले ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके प्रेम संबंधों की जानकारी सीमित है।
जोधा अकबर की प्रेम कहानी
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जजिया कर मुगल काल में गैर-मुस्लिम लोगों, खासकर हिंदुओं, से लिया जाने वाला एक विशेष कर था। इसे इस्लामी शासन व्यवस्था के तहत गैर-मुस्लिम प्रजा से वसूला जाता था। मुगल बादशाह अकबर ने 1564 ई. में जजिया कर समाप्त कर दिया था। उसका उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच बेहतर संबंध बनाना और अपने साम्राज्य में सहयोग बढ़ाना भी था। उन्होंने धार्मिक चर्चाओं को बढ़ावा दिया और 1564 में गैर-मुस्लिमों पर लगने वाला जजिया कर समाप्त कर दिया। उनके शासनकाल में फतेहपुर सीकरी जैसे शानदार भवन बने। संगीत, चित्रकला, साहित्य और इतिहास लेखन को भी प्रोत्साहन मिला।
हिंदुओं को बड़े सरकारी पद दिए
अकबर ने राजा टोडरमल और राजा भगवान दास जैसे हिंदू अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। इससे शासन और सेना में अलग-अलग समुदायों के लोगों को जगह मिली।
इतिहास की कई पाठ्य-पुस्तकों के अनुसार, 1562 में अकबर ने युद्ध में पकड़े गए लोगों के परिवारों को गुलाम बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की प्रथा पर रोक लगाने के कदम उठाए।
अकबर के शासन में राजा टोडरमल की भूमिका से जमीन की माप, फसल और औसत उपज के आधार पर लगान तय करने की व्यवस्था विकसित हुई। इसका उद्देश्य राजस्व वसूली को व्यवस्थित बनाना था, हालांकि किसानों को हर जगह समान राहत नहीं मिली।
अकबर ने फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना बनवाया, जहां धार्मिक और दार्शनिक विषयों पर चर्चा होती थी। बाद में इन चर्चाओं में अन्य धर्मों के विद्वान भी शामिल हुए।अकबर ने अलग-अलग धर्मों के लोगों को अपने दरबार में जगह दी।
अकबर का निधन 27 अक्टूबर 1605 को आगरा में हुआ। उन्हें आगरा के पास सिकंदरा स्थित मकबरे में दफनाया गया। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे जहांगीर ने मुगल साम्राज्य की गद्दी संभाली। आज भी अकबर को एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है, जिसने राजनीतिक समझ, प्रशासनिक सुधारों और धार्मिक सहिष्णुता के जरिए भारतीय इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी।
Location : New Delhi
Published : 27 October 2026, 10:03 AM IST
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