
CJI सूर्यकांत (Img: Google)
New Delhi: फोन की एक घंटी, स्क्रीन पर एक अनजान कॉल… और फिर शुरू होता है डर का खेल। खुद को अधिकारी बताने वाले ठग आपको इतना घेर लेते हैं कि समझ ही नहीं आता कब आप उनके जाल में फंस गए। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का यही खतरनाक चेहरा अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। जहां इस बढ़ते साइबर अपराध पर गहरी चिंता जताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी बढ़ती ठगी की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा (Surya Kant Sharma) ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली स्थिति है कि अच्छी शिक्षा प्राप्त लोग भी इस तरह के साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं। यह सुनवाई स्वत संज्ञान लिए गए मामले पर हो रही थी। जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची भी पीठ में शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर लगातार बैठकें हो रही हैं और सरकार तेजी से कदम उठा रही है। उन्होंने मामले को 12 मई को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने एक बुजुर्ग महिला का जिक्र किया। जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर ठगों ने महिला की पूरी रिटायरमेंट राशि हड़प ली। इस घटना पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है। एक अधिवक्ता ने भी कहा कि जब अदालत खुद इस मामले पर सुनवाई कर रही है, तब भी ऐसे मामलों का लगातार सामने आना चिंताजनक है।
इससे पहले 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल ठगी को सीधी डकैती करार दिया था। अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक, बैंकों और दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर एक मानक प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए थे। साथ ही बैंकों को संदिग्ध खातों पर तुरंत रोक लगाने और लेनदेन को ब्लॉक करने जैसे कदम उठाने को कहा गया था।
अदालत ने Central Bureau of Investigation को देशभर में डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए भी एक स्पष्ट ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया तरीका है। जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। वे लोगों को डराते हैं कि उनके खिलाफ गंभीर मामला है और उन्हें तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। डर के इस माहौल में पीड़ित को घंटों कॉल पर रोके रखा जाता है और आखिर में उससे पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी। जहां सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।
Location : New Delhi
Published : 20 April 2026, 2:30 PM IST