
चर्चित पत्थर कारोबारी श्रीनिवास ने खोला मोर्चा (Img: Google)
Chatra: झारखंड के चतरा जिले में जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो के खिलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी और सरकारी राजस्व में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के आरोपों ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। हंटरगंज प्रखंड के निवासी और चर्चित पत्थर कारोबारी श्रीनिवास ने समाहरणालय के पास एक होटल में प्रेस वार्ता कर डीएमओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। श्रीनिवास ने दावा किया कि उनके पास व्हाट्सएप चैट और विभागीय दस्तावेजों समेत ऐसे कई पुख्ता साक्ष्य हैं, जो डीएमओ को भ्रष्ट साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन परियोजना में कार्यरत एजेंसियों के माध्यम से करीब 28 महीनों तक फर्जी माइनिंग रॉयल्टी चालान जारी किए गए, जिससे सरकार को लगभग 17 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ।
कारोबारी श्रीनिवास ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी लिखित शिकायत उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी देश की शीर्ष जांच एजेंसियों से की है। उन्होंने जिला प्रशासन से डीएमओ के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है। श्रीनिवास का कहना है कि यदि किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से इसकी जांच कराई जाए तो यह झारखंड के सबसे बड़े खनन घोटालों में से एक साबित होगा और घोटाले की राशि 17 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए विभाग के किसी छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनिवास ने खनन कार्यालय के संरक्षण में नियम विरुद्ध चल रहे माइंस और क्रशरों के संचालन पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिना सीटीओ (Consent to Operate) और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के धड़ल्ले से संचालित हो रहे क्रशर और माइंस अधिकारियों को दिखाई नहीं देते, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी का जीता-जागता सबूत है।
झारखंड में नशा तस्करों पर पुलिस का शिकंजा; गुप्त सूचना पर ऐसे हुआ भंडाफोड़
दूसरी ओर, जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने मामले में नया मोड़ लाते हुए कहा कि यह गड़बड़ी 17.29 करोड़ रुपये की नहीं, बल्कि करीब 26 करोड़ रुपये की रॉयल्टी से जुड़ी है, जिसका खुलासा स्वयं खनन विभाग ने अपनी आंतरिक जांच में किया है। डीएमओ के अनुसार, जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। जांच में मुख्य कार्यदायी एजेंसी इरकॉन (IRCON) और उसकी सहयोगी कंपनी राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के दुरुपयोग के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के वार-पलटवार से राज्य का सियासी पारा गर्म है।
Location : Chatra
Published : 2 June 2026, 3:28 PM IST