8th Pay Commission 2026: CGHS में नया नियम लागू , अब सिर्फ एक ही परिवार को मिलेगा मेडिकल लाभ

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए CGHS नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए आदेश के तहत अब कर्मचारी अपने माता-पिता या ससुराल पक्ष में से केवल एक को ही मेडिकल सुविधा के लिए आश्रित चुन सकेंगे। यह विकल्प एक बार ही मिलेगा और बाद में बदला नहीं जा सकेगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 May 2026, 7:23 PM IST

New Delhi:  नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 मई 2026 को एक नया ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है। इसके अनुसार, सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) और CS(MA) Rules, 1944 के तहत अब केंद्रीय कर्मचारी अपने माता-पिता या पत्नी के माता-पिता (ससुराल पक्ष) में से केवल एक पक्ष को ही मेडिकल सुविधा के लिए डिपेंडेंट के रूप में चुन सकेंगे।

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह विकल्प केवल एक बार ही दिया जाएगा। एक बार चयन करने के बाद इसे बदला नहीं जा सकेगा, चाहे परिस्थितियां बदल जाएं। यहां तक कि माता-पिता की मृत्यु के बाद भी इस विकल्प में कोई संशोधन नहीं किया जा सकेगा। यह नियम 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से पहले लागू किया गया है और सभी मंत्रालयों व विभागों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक बार का विकल्प, बाद में बदलाव नहीं

नए आदेश के मुताबिक यदि कोई कर्मचारी शुरुआत में अपने माता-पिता को CGHS लाभार्थी चुनता है, तो वह भविष्य में ससुराल पक्ष को शामिल नहीं कर सकेगा। इसी तरह यदि ससुराल पक्ष को चुना गया है, तो बाद में माता-पिता को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

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इस व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कई परिवारों में आर्थिक और स्वास्थ्य जिम्मेदारियां दोनों पक्षों के प्रति साझा होती हैं। ऐसे में केवल एक पक्ष को चुनने का नियम व्यवहारिक रूप से कठिनाई पैदा कर सकता है।सरकार ने यह नियम सभी पात्र कर्मचारियों पर समान रूप से लागू करने की बात कही है, जिससे किसी तरह की छूट की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

कर्मचारियों के संगठन ने उठाए सवाल

ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने इस नए नियम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों को सिर्फ एक पक्ष चुनने का विकल्प दिया है, लेकिन उन परिस्थितियों पर स्पष्टता नहीं दी है जहां पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सेवा में हैं।

उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में क्या दोनों में से किसी एक को CGHS छोड़ना पड़ेगा? या फिर दोनों कर्मचारी अपने-अपने माता-पिता के लिए अलग-अलग मेडिकल सुविधा ले सकेंगे?

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डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई दंपती एक ही CGHS कार्ड के तहत लाभ लेते हैं, ऐसे में नया नियम भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है ताकि कर्मचारियों के बीच असमंजस खत्म हो सके। फिलहाल यह नया नियम केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चा और विवाद का बड़ा विषय बन गया है।

Location :  New Delhi

Published :  14 May 2026, 7:23 PM IST