Deepanshu Shokeen: बस कंडक्टर का बेटा, नंगे पांव-मर्सिडीज़ से प्रचार; कौन हैं दीपांशु शौकीन जो निर्दलीय लड़कर बना DU का VP

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में भले ही ABVP ने सबसे अधिक सीटें जीतीं हो लेकिन चर्चाओं में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले और वाइस प्रेसीडेंट की कुर्सी पर कब्जा करने वाले दीपांशु शौकीन हैं। साधारण परिवार से आने वाले दीपांशु ने असाधारण जीत दर्ज की है।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 19 September 2026, 5:24 PM IST

New Delhi: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस चुनाव में अपना परचम लहराया है। एबीवीपी ने सबसे अधिक 3 महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज की। एनएसयूआई खाता भी नहीं खोल सकी। एबीवीपी की बड़ी जीत के बाद भी निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले और वाइस प्रेसीडेंट की कुर्सी पर कब्जा करने वाले दीपांशु शौकीन सबसे अधिक चर्चाओं में हैं। साधारण परिवार से आने वाले दीपांशु ने असाधारण जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया है। वैसे भी उनकी जीत की कहानी कई मायनों में सबसे अलग है।

DUSU चुनाव में सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले दीपांशु शोकीन की कहानी कुछ अलग है। चुनाव से ठीक पहले दीपांशु ने टिकट न मिलने और कुछ विवादों के चलते नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने निर्दलिय चुनाव लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। वाइस-प्रेसिडेंट पद के लिए अपनी पूरी कैंपेन के दौरान कैंपस में नंगे पैर चलकर प्रचार किया।

चुनाव परिणाम के दिन भी काउंटिंग सेंटर के पास उन्हें नंगे पैर घूमते देखा गया

हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान दीपांशु शोकीन के काफिले में मर्सीडिज कार समेत कई बड़ी व महंगी गाड़ियां देखीं गई। माना जा रहा है कि ये गाड़ियां उनके समर्थकों की थीं और प्रचार के दौरान दीपांशु इनका इस्तेमाल करते थे। उनकी गाड़ियों के काफिले की कई रील्स सोशम मीडिया पर मौजूद है।

दिल्ली के पीरागढ़ी गाँव के रहने वाले दीपांशु शोकीन दिल्ली यूनिवर्सिटी के Department of Buddhist Studies) के छात्र हैं। उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। उन्होंने छात्रों से जुड़े कई मुद्दे उठाये और चुनाव में छात्रों की बात कई। आखिरकार वे DUSU सेंट्रल पैनल तक पहुँचे।

दीपांशु शोकीन के पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी माँ आंगनवाड़ी वर्कर के तौर पर काम करती हैं। उनका परिवार चाहता था कि वे यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) परीक्षा की तैयारी करें और एक ब्यूरोक्रेट्स बने। लेकिन उन्होंने माता-पिता की इस इच्छा के विपरीत छात्र राजनीति को चुना और पहले ही चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की।

 

Location :  New Delhi

Published :  19 September 2026, 5:24 PM IST