
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
New Delhi: वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से सितंबर 2026 भारत के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS Summit का आयोजन प्रस्तावित है। इस बार की बैठक इसलिए खास है क्योंकि BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और विस्तार के बाद पहली बार नए स्वरूप में बड़े स्तर पर बैठक करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
BRICS अब पहले की तुलना में कहीं बड़ा समूह बन चुका है। भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया इसके पूर्ण सदस्य हैं। इसके अलावा कई अन्य देशों को पार्टनर का दर्जा दिया गया है।
इस विस्तार के बाद BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग देशों के राजनीतिक और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की होगी। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाला सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की बढ़ती भूमिका का बड़ा मंच माना जा रहा है।
शिखर सम्मेलन में आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें सीमा पार भुगतान में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना प्रमुख मुद्दा हो सकता है।
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की कोशिश का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को आसान बनाना और डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। यदि इस दिशा में कोई ठोस सहमति बनती है, तो इसका असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर पड़ सकता है।
खरीदने से पहले रुकिए! क्या आपने सुजुकी की इस नई बाइक को देखा? जानिये खास फीचर्स
बैठक में मजबूत वैश्विक supply chain तैयार करने और New Development Bank (NDB) की भूमिका को और व्यापक बनाने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा MSME, digital trade और सुरक्षित artificial intelligence के इस्तेमाल को लेकर भी रणनीति तैयार किए जाने की उम्मीद है।
खास तौर पर AI आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था, रोजगार और व्यापार का बड़ा हिस्सा बनने वाला है। ऐसे में BRICS देशों के बीच AI को लेकर साझा नीति की दिशा में बढ़ना महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
इस सम्मेलन का एक बड़ा कूटनीतिक पहलू भारत और चीन के रिश्ते भी हैं। यदि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद के लिहाज से अहम अवसर होगा।
पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव के बाद भारत-चीन संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ऐसे में BRICS मंच पर दोनों देशों के नेताओं की संभावित मुलाकात को खास नजर से देखा जाएगा।
Hamirpur News: चाउमीन का ठेला, आवारा कुत्ते और फिर फायरिंग! हमीरपुर की रात में आखिर क्या हुआ?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। ऐसे में भारत-रूस के व्यापार और आर्थिक संबंधों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत के लिए यह सम्मेलन बहुपक्षीय मंच के साथ-साथ प्रमुख साझेदार देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत का अवसर भी बनेगा।
भारत BRICS की अध्यक्षता करते हुए इस बार एक ऐसे समूह का नेतृत्व कर रहा है, जिसका दायरा पहले से काफी बढ़ चुका है। अलग-अलग देशों के बीच मौजूद भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी।
11 सितंबर को होने वाले BRICS Business Forum के बाद मुख्य शिखर सम्मेलन शुरू होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 साल पुराने BRICS का विस्तारित स्वरूप वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव ला पाता है।
Location : New Delhi
Published : 8 September 2026, 11:49 AM IST