
जय श्रॉफ, एस जयशंकर, पीयूष गोयल (सोर्स- एक्स)
New Delhi: व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधार जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने के लिए ब्रिक्स बिजनेस फोरम में जोर दिया गया। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित इस प्रतिष्ठित मंच पर सदस्य देशों के दिग्गज कारोबारी और सरकारी नुमाइंदे एक मंच पर आए। भारत की अध्यक्षता में हो रही बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल प्रमुख वक्ताओं के रूप में शामिल हुए। इस वैश्विक आयोजन का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ विकास जैसे अहम मुद्दों पर सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। हर साल उसी देश में यह फोरम आयोजित होता है, जो शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने इस आयोजन के दौरान एक नया और दूरदर्शी नजरिया पेश किया है। उनके अनुसार, ब्रिक्स देशों को केवल पारंपरिक बड़े बाजारों का समूह मानने की भूल नहीं करनी चाहिए, बल्कि इसे एक ऐसे गतिशील आर्थिक नेटवर्क के रूप में देखना चाहिए जहां हर सदस्य की ताकत दूसरों के काम आ सके। इस विजन के तहत एक देश के प्राकृतिक या कच्चे संसाधन दूसरे देश के विनिर्माण क्षेत्र को नई ताकत दे सकते हैं। इसी तरह, एक बाजार में जन्मी कोई आधुनिक तकनीक दूसरे सदस्य देश के विशाल बाजार में आसानी से बड़ा पैमाना हासिल कर सकती है। इस एकीकृत मॉडल से पूंजी निवेश के लिए नई परियोजनाएं और कारोबार के लिए नए ग्राहक तलाशने की राह आसान होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की इस बार की ब्रिक्स अध्यक्षता चार स्पष्ट प्राथमिकताओं पर टिकी हुई है—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता। आयोजकों का मानना है कि ये चारों स्तंभ केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉरपोरेट जगत और उद्योगों के लिए भी समान रूप से प्रासंगिक हैं। बिजनेस काउंसिल द्वारा तैयार की गई सिफारिशें और सुझाव सीधे नीति निर्माताओं के सामने रखे जाते हैं। इन चर्चाओं का सीधा असर आने वाले समय में ब्रिक्स देशों की आर्थिक नीतियों और रणनीतिक कार्यक्रमों पर पड़ेगा।
यह बिजनेस फोरम ब्रिक्स के निजी क्षेत्र को सीधे तौर पर वैश्विक निर्णय प्रक्रिया से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। इस मंच पर होने वाली चर्चाएं सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार और निवेश को गति देती हैं। इसके अलावा, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को मजबूत करने, साझा मानकों पर आपसी सहमति बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित तथा सुचारू बनाने जैसी पहलों को इनसे सही दिशा मिलती है। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधार जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
शुक्रवार को बिजनेस फोरम के मंथन के बाद, 12 सितंबर से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम आरंभ होगा। इसमें सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता भारत की अध्यक्षता में शुरू की गई पहलों की समीक्षा करेंगे और रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने की संभावनाओं पर मंथन करेंगे। इस महासम्मेलन के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को झटकों से बचाने, सीमा पार भुगतान प्रणालियों को अधिक सुगम बनाने और राष्ट्रीय मुद्राओं के आपसी लेनदेन में उपयोग को बढ़ावा देने पर गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है।
Location : New Delhi
Published : 11 September 2026, 12:44 PM IST