भाजपा संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की सुगबुगाहट, आधे चेहरों में बदलाव की संभावना

भाजपा संसदीय बोर्ड का जल्द पुनर्गठन होने जा रहा है, जिसमें 12 में से आधे सदस्यों के बदले जाने की संभावना है। उम्र और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए कुछ नए नेताओं, एक महामंत्री और मुख्यमंत्री को सर्वोच्च संस्था में स्थान मिल सकता है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 30 September 2026, 10:18 AM IST

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन में संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर पूरा होने के बाद अब पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्टी पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और संगठन मंत्रियों की घोषणा के बाद जल्द ही राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नए सदस्यों के नामों का ऐलान किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में इस प्रक्रिया की शुरुआती तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और पितृ पक्ष के समापन के बाद अक्टूबर माह में इनकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

संसदीय बोर्ड में हो सकते हैं बड़े फेरबदल

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 12 सदस्यीय राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड में इस बार बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। बोर्ड के मौजूदा ढांचे में लगभग आधे सदस्यों को बदला जाना तय माना जा रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

वर्तमान संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा नितिन नवीन, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, डॉ सुधा यादव और डॉ सत्यनारायण जटिया शामिल हैं।

UP Rajya Sabha Election: सपा ने खोला तीसरा पत्ता, राम गोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नथवानी भरेंगे नामांकन

उम्र और समीकरणों के आधार पर तय होंगे नए नाम

पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीएस येदियुरप्पा और डॉ सत्यनारायण जटिया को बोर्ड से मुक्त किए जाने के कयास उनकी अधिक उम्र के कारण लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं के हटने के बाद भी उनके स्थान पर उन्हीं के जातिगत, वर्गीय और क्षेत्रीय समीकरणों में सटीक बैठने वाले अन्य योग्य नेताओं को अवसर दिया जाएगा। इसी तरह सर्बानंद सोनोवाल, इकबाल सिंह लालपुरा, डॉ के लक्ष्मण और डॉ सुधा यादव के स्थानों पर भी नए समीकरणों के तहत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकता है।

महामंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को मिल सकती है जगह

इस पुनर्गठन की सबसे खास बात यह है कि पार्टी के किसी एक वरिष्ठ महामंत्री को भी संसदीय बोर्ड में स्थान मिल सकता है। इस श्रेणी में विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे वरिष्ठ महामंत्रियों के नामों पर प्रमुखता से विचार चल रहा है।

IAS से राजनीति तक दिव्या मित्तल का नया कदम, अब किस सीट से उतरेंगी मैदान में?

इसके अतिरिक्त, लंबे समय के अंतराल के बाद बोर्ड में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को भी सर्वोच्च संस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है। राजनीतिक इतिहास गवाह है कि नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान भी अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान अलग-अलग समय पर संसदीय बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में भाजपा देश के 21 राज्यों में सत्ता में है, ऐसे में यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। साथ ही, पूर्व में संसदीय बोर्ड का हिस्सा रहे किसी अनुभवी नेता और एक प्रमुख महिला नेत्री को भी इस बोर्ड में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है।

Location :  New Delhi

Published :  30 September 2026, 10:18 AM IST