असम विधानसभा चुनाव 2026: प्रदेश की इन सीटों पर छिपा है असली खेल, नतीजे बदल सकते हैं पूरी सियासत की दिशा

असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज 126 सीटों पर मतदान जारी है। भाजपा हैट्रिक की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस वापसी के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में राज्य की तीन अहम सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 April 2026, 8:29 AM IST

Dispur: असम विधानसभा चुनाव 2026 के तहत आज राज्य की 126 सीटों पर मतदान जारी हो चुका है। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। इस चुनाव में करीब 2.50 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस लंबे समय बाद सत्ता हासिल करने के लिए जोर लगा रही है।

ऐसे में बता दें कि असम का चुनावी रण इस बार बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यहां नेतृत्व, विकास और सामाजिक समीकरणों की सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।

अहम सीटों पर कड़ी टक्कर

असम विधानसभा चुनाव 2026 में कुछ सीटें राजनीतिक रूप से बेहद अहम बन गई हैं, जहां मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं बल्कि प्रभाव, अनुभव और जनाधार का भी है।

जलुकबाड़ी सीट: यह सीट मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का गढ़ मानी जाती है। वे यहां से लगातार कई बार जीत दर्ज कर चुके हैं। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस की बिदिशा नियोग से है। सीट पर हिंदू वोटरों का दबदबा है, जिससे भाजपा को बढ़त मिलती रही है।

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दिसपुर सीट: राजधानी क्षेत्र की यह सीट शहरी और सरकारी कर्मचारियों के वोट पर निर्भर है। यहां मध्यम वर्ग का प्रभाव ज्यादा है। ऐसे में भाजपा की पकड़ मजबूत है, लेकिन कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक मुकाबले को कड़ा बनाता है।

जोरहाट सीट: यह सीट खास इसलिए है क्योंकि गौरव गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा के अनुभवी नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी हैं, जो कई बार चुनाव जीत चुके हैं। यहां अनुभव बनाम नई राजनीति की सीधी टक्कर है।

असम की राजनीतिक पृष्ठभूमि

असम की राजनीति में कांग्रेस का लंबे समय तक दबदबा रहा है। पिछले 76 वर्षों में कांग्रेस ने करीब 51 साल तक शासन किया। 1978 में पहली बार राज्य में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी, लेकिन यह ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। 1985 में असम गण परिषद (AGP) के उभार ने राजनीति को नया मोड़ दिया। इसके बाद कांग्रेस ने फिर वापसी की और 2001 से 2016 तक तरुण गोगोई के नेतृत्व में लगातार तीन बार सरकार बनाई।

भाजपा का उभार और वर्तमान समीकरण

2016 में भाजपा ने पहली बार असम में सरकार बनाई और नॉर्थ-ईस्ट की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 2021 में पार्टी ने दोबारा जीत हासिल की और हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने। हिमंता का राजनीतिक अनुभव और विभिन्न दलों के साथ उनका जुड़ाव उन्हें एक मजबूत नेता बनाता है। इस चुनाव में भाजपा उनके नेतृत्व में तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है।

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मतदाताओं की भूमिका और आंकड़े

असम में कुल 2.50 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं की संख्या 5.75 लाख है, जो चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा 20 से 29 वर्ष के युवा मतदाता करीब 66 लाख हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या होगा चुनाव का नतीजा?

असम विधानसभा चुनाव 2026 का परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। भाजपा जहां विकास और स्थिरता के मुद्दे पर वोट मांग रही है, वहीं कांग्रेस बदलाव और अपने पुराने जनाधार के सहारे वापसी की उम्मीद कर रही है। अब नजर इस बात पर है कि जनता किसे सत्ता की चाबी सौंपती है।

 

Location :  Dispur

Published :  9 April 2026, 8:29 AM IST