Birthday Special: अशफाक उल्ला खान ने देश की आजादी के लिए हँसते- हँसते दी थी जान

भारत की आजादी की लड़ाई मे खुशी- खुशी दी जान आइए जानते उनके जीवन से जुड़ी बाते।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 22 October 2026, 8:57 AM IST
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 New Delhi: भारत की आजादी की लड़ाई में अनगिनत वीरों ने अपना जीवन देश के नाम कर दिया। इन्हीं महान क्रांतिकारियों में अशफाक उल्ला खां का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और देश को आजाद करने के लिए अपने प्राण दे दिए। उनका जीवन साहस, देशभक्ति और हिंदू- मुस्लिम एकता की मिसाल है। अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देश के लिए प्रेम था।

 साथियों के साथ मिलकर काकोरी कांड को अंजाम दिया

काकोरी कांड 9 अगस्त 1925 को हुआ था। इसे काकोरी ट्रेन एक्शन या काकोरी षड्यंत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस घटना में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन के निकट सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को रोककर धन लूटा था। इस धन का इस्तेमाल स्वतंत्रता आंदोलन के लिए हथियार खरीदने और क्रांतिकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना था।
इस कार्रवाई में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह सहित कई क्रांतिकारी शामिल थे। काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी की सजा दी गई।

देश के लिए दिया बलिदान

अशफाक उल्ला खां को गिरफ्तार किया और मुकदमा चलाया गया। अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में उन्हें फांसी दी गई थी। उन्होंने अपने अंतिम समय पर भी देश के प्रति अपना विश्वास बनाए रखा।

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

अशफाक उल्ला खां और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती की आज भी एकता और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। दोनों अलग- अलग धर्मों से थे, पर दोनों का लक्ष्य एक ही था, देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना। चौरा-चौरी की घटना भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जिसके बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया। यह घटना अशफाक उल्ला खा के काकोरी अभियान से अलग थी, लेकिन दोनों घटनाएं स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। अशफाक उल्ला खां का बलिदान आज भी देशवासियों को साहस, एकता और देशप्रेम की प्रेरणा देता है।

Location :  New Delhi

Published :  22 October 2026, 8:57 AM IST

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