
डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं(Source: Google)
New Delhi: आज, 14 अप्रैल 2026 को पूरा भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती मना रहा है। यह दिन उस महान व्यक्तित्व को समर्पित है जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को उसका 'संवैधानिक आधार' दिया। बाबासाहेब के नाम से प्रसिद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर न केवल एक विधिवेत्ता और अर्थशास्त्री थे, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए समानता और सम्मान की आवाज़ भी थे।
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था। एक ऐसे समाज में जन्म लेने के बाद जहाँ कदम-कदम पर भेदभाव था, उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय (न्यूयॉर्क) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
1947 में स्वतंत्रता के बाद, उन्हें देश का पहला कानून मंत्री बनाया गया और संविधान की मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भारतीय संविधान को आकार दिया। उनकी इसी अतुलनीय सेवा के लिए 1990 में उन्हें मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
अंबेडकर जयंती सिर्फ एक सार्वजनिक अवकाश नहीं, बल्कि उन मूल्यों को याद करने का दिन है जिनके लिए बाबासाहेब जीवन भर लड़े। उनका मानना था कि सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी है। आज भी शिक्षा, लैंगिक समानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ उनकी सीख उतनी ही प्रासंगिक है जितनी दशकों पहले थी।
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"जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।"
"मैं किसी समुदाय की प्रगति उस डिग्री से मापता हूँ जो महिलाओं ने हासिल की है।"
"बुद्धि का विकास मानव अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।"
"स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाने वाले धर्म को मैं पसंद करता हूँ।"
"जो इतिहास भूल जाते हैं, वे इतिहास नहीं बना सकते।"
Location : New Delhi
Published : 14 April 2026, 7:17 AM IST