Allahabad High Court की अहम टिप्पणी: आम आदमी की आजीविका का अधिकार नेता का चुनाव लड़ने के अधिकार जैसा ही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आम आदमी की आजीविका का अधिकार भी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार जितना महत्वपूर्ण है। मामला 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से भी जुड़ा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 October 2026, 9:21 AM IST

New Delhi: आम आदमी की आजीविका का अधिकार कितना महत्वपूर्ण है और क्या इसे किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कमतर माना जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है। हत्या के मामले में दोषी नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी सजा और दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आम आदमी की आजीविका का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना किसी राजनेता का चुनाव लड़ने का अधिकार।

क्या है पूरा मामला?

नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को वर्ष 2017 में कारसेवक प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में वाराणसी की अदालत ने अप्रैल 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने की। अदालत ने सुनवाई के दौरान उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाते हुए जमानत देने का आदेश दिया।

2027 के विधानसभा चुनाव का भी उठा मुद्दा

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि नंदलाल राय की राजनीतिक पृष्ठभूमि है और वह वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निर्दलीय या भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, यदि उनकी सजा पर रोक नहीं लगती, तो उनके चुनाव लड़ने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

इसी संदर्भ में अदालत के सामने चुनाव लड़ने के अधिकार और आम नागरिक की आजीविका के अधिकार का मुद्दा आया। कोर्ट की टिप्पणी ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी और जीवनयापन का अधिकार भी महत्वपूर्ण है।

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कोर्ट ने आजीविका के अधिकार पर क्या कहा?

अदालत ने कहा कि राजनेताओं का मतदाताओं के प्रति कर्तव्य होता है, लेकिन आम आदमी की आजीविका के अधिकार को भी कम महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता। कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यह है कि अधिकारों और उनके प्रभावों पर विचार करते समय आम नागरिक के जीवनयापन से जुड़े पहलुओं को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

Location :  Allahabad

Published :  21 October 2026, 9:21 AM IST