
नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026'का आज तीसरा दिन है। भारत में एआई इंपैक्ट समिट में हिस्सा लेने वाले दिग्गजों का भारत पहुंचने का सिलसिला जारी हो गया है। पूर्व नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने डिजिटल इकोसिस्टम में भारत के योगदान के बारे में बड़ा दावा किया है।
16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में चलने वाला यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा वैश्विक एआई समिट बताया जा रहा है। जहां दुनिया भर की टेक कंपनियां, स्टार्टअप, शोध संस्थान, केंद्रीय मंत्रालय और राज्य सरकारें हिस्सा ले रही हैं।
दूसरे दिन के सत्र में पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि अगर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का मजबूत ढांचा नहीं होगा, तो AI वैश्विक स्तर पर असमानता बढ़ा सकता है। भारत की वैश्विक एआई प्रणाली में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कांत ने बताया कि विकासशील देशों से बड़ी मात्रा में डेटा पहले से ही वैश्विक मॉडलों को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हो रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत आज ओपनएआई के ChatGPT को अमेरिका से 33% अधिक डेटा उपलब्ध करा रहा है। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि भारत एआई इकोसिस्टम में कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
कांत ने कहा कि हम ओपनएआई को अमेरिका से भी ज्यादा डेटा दे रहे हैं। ग्लोबल साउथ का डेटा मॉडलों को बेहतर बना रहा है। ये मॉडल बाद में आपको महंगे उत्पाद बेचेंगे। इसलिए भारत को अपने डेटा पर आधारित खुद के मॉडल बनाने चाहिए।
कांत ने तर्क दिया कि विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता भारत को उन्हीं महंगे एआई उत्पादों पर आश्रित बना सकती है, जो उसके नागरिकों के डेटा से तैयार किए गए हैं। उनका कहना था कि घरेलू डेटा सेट पर प्रशिक्षित स्वदेशी मॉडल विकसित करने से किफायत और रणनीतिक स्वायत्तता दोनों सुनिश्चित होंगी।
बता दें कि यह समिट न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इससे आने वाले वर्षों में एआई की दिशा और नीतियों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, टेक कंपनियों के सीईओ, नीति निर्माता और एआई विशेषज्ञ एक मंच पर एआई के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
इस वैश्विक समिट में दुनियाभर के नीति निर्माता, एआई विशेषज्ञ, शिक्षाविद, टेक इनोवेटर और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैश्विक मुद्दों, शासन, सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव पर चर्चा की जा रही है।
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एआई का उपयोग स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और वित्त जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है। ऐसे में इस समिट से निकलने वाले फैसले आने वाले वर्षों में दुनिया भर में एआई के विकास और उपयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 18 February 2026, 1:27 PM IST