हैकर्स का सबसे घातक हथियार बना AI: भारत की 96% कंपनियों पर हुए बड़े साइबर हमले, जानिए सुरक्षा में कहां हुई चूक

सिस्को की नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले 12 महीनों में भारत के 96% संगठनों पर साइबर हमले हुए हैं। हैकर्स अब एआई को हथियार बना रहे हैं, वहीं सुरक्षा टीमें भी ढाल के तौर पर एआई का इस्तेमाल कर रही हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 1 October 2026, 9:24 AM IST

New Delhi: भारत में साइबर हमलों का दायरा और तरीका दोनों ही तेजी से बदल रहे हैं। नेटवर्किंग दिग्गज सिस्को (Cisco) की 'रिलेंटलेस डिफेंस रिपोर्ट' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले 12 महीनों में भारत के 96 प्रतिशत संगठनों को ऐसे साइबर हमलों का सामना करना पड़ा है, जिनसे उनके सामान्य कामकाज में बड़ी बाधा आई।

इस रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि हर तीन में से एक से अधिक मामलों में हैकर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके हमलों को अधिक सटीक और खतरनाक बनाया है।

आंतरिक तालमेल की कमी बनी साइबर सुरक्षा में सबसे बड़ी सेंध

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां केवल सुरक्षा उपकरण खरीदकर खुद को सुरक्षित नहीं कर सकती हैं। भारत में सबसे बड़ी कमजोरी तकनीक की कमी नहीं, बल्कि कंपनियों के अंदर की दूरी है। केवल 40 प्रतिशत भारतीय कंपनियों ने माना कि उनकी सिक्योरिटी, आईटी और नेटवर्किंग टीमें एक साथ मिलकर काम करती हैं।

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यानी करीब 60 प्रतिशत संगठनों में अलग-अलग काम कर रही टीमों के कारण खतरे पर फैसला लेने में देरी होती है। इसके अलावा, 49 प्रतिशत सुरक्षा पेशेवरों का कहना है कि उनके तकनीकी डेटा को कंपनी के उच्च अधिकारियों को समझाना बेहद मुश्किल साबित होता है।

AI ही बना हैकर्स का हथियार और सुरक्षा की ढाल

जहां एक तरफ हैकर्स एआई से लैस होकर कंपनियों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा टीमों के लिए भी एआई एक मजबूत ढाल साबित हो रहा है। भारत के 90 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि एआई के उपयोग से खतरों को पहचानने और उन पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की उनकी क्षमता में कम से कम 25 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

देश के लगभग 40 प्रतिशत संगठन अपने सिक्योरिटी ऑपरेशन्स में एआई एजेंट्स को लागू कर चुके हैं, हालांकि डेटा लीक और सुरक्षा जोखिमों के डर से कुछ कंपनियां इसे अपनाने में झिझक भी रही हैं।

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वैश्विक औसत से आगे रहने के बावजूद केवल 8% कंपनियां ही पूरी तरह सुरक्षित

सुरक्षा की इस परीक्षा में भारत का प्रदर्शन वैश्विक स्तर से थोड़ा बेहतर रहा है। सिस्को के मूल्यांकन में भारत का औसतन स्कोर 100 में से 66 रहा, जबकि वैश्विक औसत 64 था। हालांकि, चिंता की बात यह है कि भारत की केवल 8 प्रतिशत कंपनियां ही सुरक्षा के मामले में सबसे शीर्ष (टॉप परफॉर्मिंग) श्रेणी में पहुंच सकी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बजट बढ़ाने के बजाय टीमों के बीच बेहतर समन्वय और एआई का सही इस्तेमाल ही कंपनियों को इन अत्याधुनिक साइबर हमलों से बचा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  1 October 2026, 9:24 AM IST