
दोषियों को दी गई मौत की सजा (Img: AI Generated Image)
Azamgarh/Ahmedabad: वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा 38 दोषियों को दी गई मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद करीब 17 साल पुराने इस मामले की चर्चा एक बार फिर पूरे देश में शुरू हो गई है।
मामले के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित पटेल के अनुसार, इस केस की सुनवाई मार्च 2025 से लगातार रोजाना चल रही थी। मंगलवार को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाया और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को यथावत रखते हुए दोषियों की सजा में कोई बदलाव नहीं किया।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का नाम भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, सरायमीर थाना क्षेत्र के बीनापार गांव निवासी मुफ्ती अबू बशर को इस मामले का मास्टरमाइंड माना गया था। इसके अलावा संजरपुर निवासी मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद सैफ, बाज बहादुर क्षेत्र के शकीब निसार और बदरका चौकी के सैफुर रहमान सहित कई नाम इस मामले से जुड़े आरोपियों में शामिल रहे। कोर्ट के फैसले के बाद इन सभी नामों की फिर चर्चा शुरू हो गई है।
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26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर 21 अलग-अलग स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि लगभग 200 लोग घायल हुए थे। यह देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है। घटना के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं और लंबी जांच के बाद कुल 80 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान आजमगढ़ निवासी मुफ्ती अबू बशर का नाम कथित मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया था।
जांच के दौरान एटीएस और अन्य खुफिया एजेंसियों ने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की। जांच में आजमगढ़ के सरायमीर निवासी मुफ्ती अबू बशर का नाम सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आजमगढ़ से लेकर लखनऊ तक लगातार कार्रवाई की। इसके बाद अबू बशर को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाया गया और मामले में कई अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई।
इस मामले में सभी आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया गया था। कुछ वर्ष पहले इसी केस में हबीब अहमद, शाकिब निसार और जाकिर शेख को सबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया था। वहीं जिन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी और अब हाई कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है।
मंगलवार को हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद आजमगढ़ के उन गांवों में भी सन्नाटा देखने को मिला, जहां से आरोपियों का संबंध बताया गया था। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों के परिजनों की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। फैसले के बाद जिले में एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में पहले भी आजमगढ़ का नाम सामने आता रहा है। विशेष रूप से संजरपुर और सरायमीर क्षेत्र कई बार सुरक्षा एजेंसियों की जांच का हिस्सा रहे हैं। इन्हीं कारणों से लंबे समय तक यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा। अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में भी कई आरोपियों के तार आजमगढ़ से जुड़े होने की बात जांच के दौरान सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने यहां व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया था।
Location : New Delhi
Published : 7 July 2026, 6:29 PM IST