आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालत कुछ और ही बयां कर रहे है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। वहीं पार्टी के भीतर तहलका मचा हुआ है।

आप के ये बड़े चेहरे हुए बागी
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बयान के बाद सियासत गरमा गई। इस मामले ने पार्टी के भीतर की टकराव की स्थित को उजागर किया। हालांकि राघव चड्ढा ने पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी मन की बात कह दी। उन्होंने कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।
राघव चड्ढा का वीडियो वायरल होने के बाद सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई। राजनीतिक जानकारों की माने तो चड्डा दूसरी पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
बता दें कि प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, कपिल मिश्रा, स्वाति मालीवाल जैसे कई बड़े नेता पहले भी पार्टी के खिलाफ नजर आ चुके हैं। उन्होंने पार्टी के कामकाज करने के तरीकों पर सवाल उठाए और अपनी आवाज को बुलंद किया।
गौरतलब है कि राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटाकर उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने न केवल नेतृत्व में बदलाव किया, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। इसके बाद से आम आदमी पार्टी और चड्ढा के बीच दूरियों की चर्चा शुरू हो गई है।
प्रशांत भूषण
प्रशांत भूषण भी आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में से एक थे लेकिन उन्होंने भी आम आदमी पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे और कहा था कि पार्टी एक व्यक्ति केंद्रित है। प्रशांत भूषण ने कहा है कि पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र तो है, लेकिन स्वराज नहीं है।
पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाने के साथ पार्टी फंड की जांच के लिए एथिक्स कमेटी की मांग भी की थी। उनका पार्टी से मोहभंग हो गया था और वो आम आदमी पार्टी से अलग हो गए थे।
स्वाति मालीवाल
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की शिकायत पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मालीवाल ने शिकायत में कहा था कि जब वह 13 मई को सीएम आवास मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने पहुंचीं थी तो बिभव ने उनके साथ मारपीट की। मालीवाल की शिकायत पर पुलिस ने बिभव कुमार को 18 मई को गिरफ्तार किया था। इस मामले के दौरान स्वाति ने पार्टी और उसके कद्दावर नेताओं पर कई आरोप लगाए थे।
कुमार विश्वास
कुमार विश्वास की राजनीति में एंट्री की बात करें तो वह लोकपाल को लेकर किए गए अन्ना आंदोलन में जुड़े। इसमें अरविंद केजरीवाल के साथ वह बड़े नामों में शामिल थे। अन्ना आंदोलन के कुछ समय बाद 2012 में जब अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के गठन का फैसला किया तो वह उनके साथ नजर आए और आम आदमी पार्टी के जरिये राजनीति में आ गए।
2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा। कुमार विश्वास से जब यह पूछा गया कि क्या आपकी राजनीति पर विराम लग गया है, तो उन्होंने कहा कि मैं झूठ नहीं कह सकता। मैं पार्टी में गलत कामों का विरोध करता था, इसलिए मुझे किनारे किया गया।
योगेंद्र यादव
योगेंद्र यादव का कहना है कि आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ चले एक बड़े जनांदोलन के बाद हुआ। जनता ने अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में आप में एक विकल्प देखा। आप को जो भी सफलता मिली है, वह परंपरागत राजनीति के खिलाफ जनता के मन में बैठे असंतोष के कारण थी। लेकिन अब पार्टी की कार्य करने का तरीका अन्य पार्टियों की तरह ही हो गया है। इसके बाद योगेंद्र यादव ने पार्टी से किनारा कर लिया।
शाजिया इल्मी
शाजिया ने 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी। साल 2014 में वो आप के टिकट पर गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी वीके सिंह से शिकस्त मिली। लेकिन इसके बाद उन्होंने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया।
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कपिल मिश्रा
कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। कपिल मिश्रा ने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के घर पर केजरीवाल को मंत्री सत्येंद्र जैन से दो करोड़ रुपए लेते देखा था। इसके साथ ही कपिल मिश्रा ने 400 रुपये के पानी टैंकर घोटाले में अरविंद केजरीवाल के शामिल होने का आरोप लगाया थे।
इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था, इससे पहले उन्हें केजरीवाल की कैबिनेट से मंत्री पद से हटा दिया गया था। अब वह दिल्ली सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं।
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वहीं आम आदमी पार्टी ने कहा कि राघव चड्ढा लंबे समय से पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे। जनहित के मुद्दों पर नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसी भी पार्टी में नेतृत्व और पदों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई सदस्य पार्टी के सामूहिक फैसलों जैसे वॉकआउट या विरोध का समर्थन नहीं करता और व्हिप के खिलाफ जाता है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे। वहीं पार्टी के अंदर टकराव के सवाल पर पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।