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पुतला जलाने की परंपरा
क्या पुतला जलाने की परंपरा हमेशा से थी?
आमतौर पर दशहरे को रावण-दहन के साथ जोड़कर देखा जाता है, लेकिन भारत में विजयादशमी मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर में करीब 600 साल पुराना दशहरा उत्सव मनाया जाता है, जिसमें रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। यहां मां दंतेश्वरी की आराधना और आदिवासी परंपराएं उत्सव का केंद्र हैं। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर भी इस विशिष्ट परंपरा का उल्लेख है।
कितने रावण मारे गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है, मगर ये जरुर है कि असली रावण जो विकार रुपी अंदर होता है, जिससे कई अपराध किए जाते है क्या वह रावण मर पा रहा है हर साल हम रावण दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत पा लेते है, मगर अंदर के जो रावण है उसका क्या?
दरअसल, इस परंपरा का सवाल सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है। रावण-दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। असली चुनौती यह है कि उत्सव के बाद भी लोग अपने जीवन में अहंकार, अन्याय और गलत आचरण से लड़ने का संकल्प निभाएं। क्योंकि पुतला जलाना एक परंपरा है, जबकि बुराई को मिटाना लगातार चलने वाली जिम्मेदारी है।
Location : New Delhi
Published : 19 October 2026, 1:35 PM IST