
प्रतीकात्मक छवि (Img- Pinterest)
Mumbai: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक बार फिर किसान की बेबसी और व्यवस्था की नाकामी का रुला देने वाला मामला सामने आया है। रालेगांव तहसील के भांब गांव निवासी 49 वर्षीय किसान राजू बापुराव चुड्डुके बैंक की चौखट से जिस उम्मीद के साथ लौटे थे, वह उम्मीद ही उनकी मौत की वजह बन गई। राजू के पास 1 हेक्टेयर 39 आर खेती थी और उन पर बैंक का भारी कर्ज था। शनिवार (25 जुलाई) को जब वे रालेगांव स्थित मध्यवर्ती बैंक में सरकार की कर्जमाफी सूची देखने पहुंचे, तो उसमें अपना नाम न पाकर गहरे सदमे में आ गए।
घर लौटने के बाद राजू पूरे दिन गुमसुम और मानसिक तनाव में रहे। आखिरकार, शनिवार रात करीब 10 बजे उन्होंने अपने ही घर में ज़हर पी लिया। परिजन उन्हें तुरंत इलाज के लिए रालेगांव ग्रामीण अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। मृतक राजू अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
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परिजनों का साफ कहना है कि बीज-खाद के बढ़ते दाम, खेती की ऊंची लागत, सूखे की मार और ऊपर से बैंक के कर्ज ने परिवार का जीना दूभर कर दिया था। ऐसे में सरकार की कर्जमाफी योजना ही उनकी आखिरी उम्मीद थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार ने बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन पात्र किसानों के नाम सूची से गायब हैं।
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किसान आत्महत्याओं के लिए संवेदनशील माने जाने वाले यवतमाल में हुई इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करने, कर्जमाफी की लिस्ट की दोबारा समीक्षा करने और पीड़ित परिवार को तुरंत मुआवजा देने की मांग की है।
Location : Mumbai
Published : 27 July 2026, 2:48 PM IST
Topics : crime news Farmer Crisis Mumbai News Yavatmal News