Bombay High Court: चांद पर पहुंचा भारत, लेकिन समाज में अब भी कायम है ये कड़वी सच्चाई; कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाथ से मैला ढोने और खतरनाक सफाई के दौरान होने वाली मौतों को लेकर महाराष्ट्र सरकार की नीति रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि सरकार को ऐसे मृत श्रमिकों के आश्रितों को 30 लाख रुपये मुआवजा देना होगा। छह महीने में सभी मामलों की पहचान करने का भी निर्देश दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 1:03 PM IST

Mumbai: हाथ से मैला ढोने और खतरनाक सफाई के दौरान होने वाली मौतों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि भारत भले ही चांद तक पहुंच चुका है, लेकिन समाज में जाति व्यवस्था और उससे जुड़ी सामाजिक बुराइयां अब भी मौजूद हैं। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की उस नीति को रद्द कर दिया, जिसमें खतरनाक सफाई के दौरान जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी निजी सोसाइटियों और नियोक्ताओं पर डाली गई थी।

सरकार को पहले देना होगा मुआवजा

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए निजी संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मृत श्रमिकों के आश्रितों को तत्काल मुआवजा दे। इसके बाद सरकार चाहे तो संबंधित निजी संस्थाओं या नियोक्ताओं से राशि की वसूली कर सकती है।

छह महीने में करनी होगी पहचान

अदालत ने राज्य सरकार को छह महीने के भीतर उन सभी लोगों की पहचान करने का निर्देश दिया, जिनकी मौत मैनुअल स्कैवेंजर्स अधिनियम, 2013 के दायरे में आने वाली खतरनाक सफाई के दौरान हुई है। पहचान पूरी होने के बाद प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

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जातिगत भेदभाव पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

पीठ ने कहा कि 21वीं सदी में भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद देश में जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुप्रथाओं का बने रहना चिंता की बात है। अदालत ने माना कि ऐसी प्रथाएं लोगों को ऐसा काम करने के लिए मजबूर करती हैं, जो उनकी मानवीय गरिमा के खिलाफ है।

मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना

अदालत ने यह भी कहा कि मैनुअल स्कैवेंजर्स अधिनियम, 2013 सार्वजनिक और निजी नियोक्ताओं के आधार पर श्रमिकों के बीच भेदभाव नहीं करता। ऐसे में मुआवजे की जिम्मेदारी निजी पक्षों पर डालने वाली महाराष्ट्र सरकार की नीति को अदालत ने समानता के मौलिक अधिकार के खिलाफ माना।

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पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत

हाईकोर्ट के इस फैसले से खतरनाक सफाई के दौरान जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को ऐसे मामलों की पहचान और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। साथ ही निजी संस्थानों और नियोक्ताओं की भूमिका को लेकर भी सरकार बाद में कार्रवाई कर सकती है।

Location :  Mumbai

Published :  5 September 2026, 1:03 PM IST