
मंगलेश्वर धाम में शिव भक्तों की उमड़ी भारी भीड़
Sonbhadra: सावन के पवित्र महीने के चौथे और अंतिम सोमवार को सोनभद्र जिले के सबसे ऊंचे और दुर्गम क्षेत्र में स्थित मंगलेश्वर महादेव धाम में हजारों शिव भक्तों ने जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। चोपन से लगभग 30 किलोमीटर की कठिन यात्रा, घने जंगलों और झरनों से गुजरते हुए, श्रद्धालुओं ने पूरी की। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति देखते ही बन रही थी।
यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पौराणिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर कैमूर पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी छोर पर स्थित है और खास बात यह है कि यह 'ॐ' (ओम) की आकृति वाले पर्वत पर स्थित है। स्थानीय लोग इस पहाड़ी को 'खोड़वा पहाड़' के नाम से जानते हैं।
खोड़वा पहाड़
माना जाता है कि गुप्तकाशी के रूप में विख्यात सोनभद्र के इस क्षेत्र में महादेव के अनेकों मंदिर हैं, लेकिन मंगलेश्वर धाम की खास महिमा है। धार्मिक ग्रंथों में इसे सृष्टि के उद्गम स्थल के रूप में भी वर्णित किया गया है। यहीं पर ऋषि अवधूतराम और चंद्रा ऋषि ने वर्षों तक तपस्या की थी और सिद्धि प्राप्त की थी।
इस पहाड़ी की ऊंचाई 1850 फीट है और यह समुद्र तल से ऊपर स्थित है। 70 किलोमीटर के दायरे में फैली इस पर्वत श्रृंखला में कई झरने, रहस्यमयी गुफाएं, और आदिमानवों के निवास के प्रमाण भी मिलते हैं, जो इसे धार्मिक के साथ-साथ पुरातात्विक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।
यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां से सूर्योदय, झरने, और सोन नदी का दृश्य मन को मोह लेने वाला होता है। पहाड़ों के बीच बसे इस मंदिर में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कई कठिन रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन भोलेनाथ की भक्ति में डूबे भक्त इन सब कठिनाइयों को भुलाकर मंगलेश्वर बाबा के दर्शन करने आते हैं।
श्रद्धालु मानते हैं कि इस धाम में जो भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी हर इच्छा जरूर पूरी होती है। यही कारण है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों से भी हजारों शिवभक्त हर साल सावन में यहां आते हैं।
Location : Sonbhadra
Published : 4 August 2025, 5:39 PM IST
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