स्लिम होने के चक्कर में अपनी सेहत के साथ ये कैसा बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं पुरुष? रिसर्च में बड़ा खुलासा

तेजी से वजन घटाने वाली इन लोकप्रिय दवाओं के सेवन से पुरुषों की सेहत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा सामने आया है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। आखिर क्या है इन दवाइयों का अंदरूनी सच?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 September 2026, 8:39 AM IST

New Delhi: तेजी से वजन कम करने की चाहत में लोग अक्सर शॉर्टकट के रूप में वेट लॉस दवाओं का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन दवाओं का असर वजन पर तो दिखता है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों पर इनके गंभीर नकारात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। हाल ही में सामने आई एक मेडिकल रिसर्च ने इन दवाओं के प्रयोग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। अध्ययन के मुताबिक, जो पुरुष वजन घटाने वाली दवाओं का सेवन करते हैं, उनमें गंजेपन की समस्या होने का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

वंशानुगत कारणों से और घातक हो जाती है स्थिति

एनवाईयू लैंगोन हेल्थ के रिसर्चर्स द्वारा किया गया यह अध्ययन प्रतिष्ठित 'जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी' में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। इस शोध में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय, किंग्स कॉलेज लंदन और कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि वजन नियंत्रित करने वाली इन दवाओं का सीधा संबंध पुरुषों में होने वाले गंजेपन के बढ़ते खतरे से है। जिन पुरुषों में पहले से ही गंजेपन या बालों के झड़ने का कोई वंशानुगत (जेनेटिक) इतिहास या झुकाव होता है, उनमें यह जोखिम सात प्रतिशत और अधिक बढ़ जाता है। यानी जेनेटिक रूप से संवेदनशील पुरुषों के लिए ये दवाएं दोगुनी खतरनाक साबित हो सकती हैं।

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ओजेम्पिक, वेगोवी और जेपबाउंड जैसी दवाएं हैं दायरे में

शोधकर्ताओं ने अपनी जांच के दौरान पाया कि बाजार में उपलब्ध कुछ बेहद चर्चित और लोकप्रिय वजन घटाने वाली दवाइयां इस समस्या की मुख्य वजहों में शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से ओजेम्पिक (Ozempic), वेगोवी (Wegovy) और जेपबाउंड (Zepbound) जैसी दवाएं हैं। जब इन दवाओं का सेवन किया जाता है, तो वजन तो कम होता है, लेकिन इसके साथ ही बालों के तेजी से झड़ने और गंजेपन का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।

जीएलपी-1 एक्टिविटी और एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया का कनेक्शन

यह अपनी तरह का पहला ऐसा पीयर-रिव्यूड अध्ययन है, जिसने जीएलपी-1 (GLP-1) एक्टिविटी और 'एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया' (पुरुषों में होने वाला सामान्य गंजापन) के बीच एक सीधा जेनेटिक कनेक्शन ढूंढ निकाला है।

इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 'जीएलपी-1 आर जीन' का गहराई से अध्ययन किया। यह जीन प्राकृतिक रूप से शरीर के भीतर जीएलपी-1 रिसेप्टर प्रोटीन के स्तर को नियंत्रित और प्रभावित करता है। इसके बाद इस गतिविधि की तुलना पुरुषों में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया से जुड़े आनुवंशिक मार्करों के साथ की गई। केवल यहीं नहीं, बल्कि शोधकर्ताओं ने बालों के झड़ने से जुड़े अन्य तमाम संभावित और पर्यावरणीय कारकों का भी बहुत बारीकी से मूल्यांकन किया, जिसके बाद यह स्पष्ट निष्कर्ष सामने आया है।

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सावधानी ही है सबसे बड़ा बचाव

वजन घटाने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव और प्राकृतिक तरीकों के बजाय इन दवाओं पर निर्भरता लोगों के लिए भारी पड़ सकती है। यह नया वैज्ञानिक अध्ययन इस बात की चेतावनी देता है कि सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या (वजन) को ठीक करने के फेर में लोग अनजाने में गंजेपन जैसी दूसरी गंभीर समस्या को बुलावा दे रहे हैं। इसलिए, किसी भी तरह की वेट लॉस दवा का सेवन करने से पहले उसके संभावित दुष्परिणामों पर विचार करना बेहद जरूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  7 September 2026, 8:39 AM IST