
ओवर-फ्रेंडली पेरेंटिंग (सोर्स-Pinterest)
New Delhi: बच्चों की परवरिश करना एक बेहद बड़ी और उम्रभर की जिम्मेदारी है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा संस्कारी बने और हमेशा अनुशासन में रहे। इसके लिए आजकल के पेरेंट्स बच्चों के साथ बहुत ज्यादा दोस्ताना व्यवहार करने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा फ्रेंडली होना कभी-कभी आप पर ही भारी पड़ सकता है? कई बार इस वजह से बच्चे जिद्दी हो जाते हैं और माता-पिता की किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेते। ऐसे में बच्चों के साथ दोस्ती और अनुशासन (डिसिप्लिन) के बीच एक सही संतुलन बनाना बहुत जरूरी हो जाता है।
बच्चों से दोस्ती करना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने मन की उलझन और बातें बिना किसी डर के आपके साथ शेयर कर सकें। लेकिन इस दोस्ती की भी एक सीमा होनी चाहिए, जिससे बच्चे अनुशासन का महत्व न भूलें। पेरेंट्स कुछ आसान तरीकों को अपनाकर दोस्ती और कड़े नियमों के बीच एक बेहतरीन तालमेल बिठा सकते हैं।
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बच्चों को सीधे अनुशासन का पाठ पढ़ाने से पहले उनके साथ एक मजबूत कनेक्शन बनाना जरूरी है। उन्हें हमेशा इस बात का भरोसा दिलाएं कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, आप हर हाल में उनके साथ खड़े हैं। इसके लिए बच्चों के साथ समय बिताने का एक समय तय करें। जब आप उनके साथ एक निश्चित शेड्यूल के अनुसार क्वालिटी टाइम बिताएंगे, तो वे धीरे-धीरे अनुशासन का असली मतलब समझने लगेंगे।
एक दोस्त की तरह बच्चों को उनका पर्सनल स्पेस देना बेहद जरूरी है। लेकिन माता-पिता होने के नाते उन पर नजर रखना भी आपकी परवरिश का एक जरूरी हिस्सा है। ध्यान रहे कि बच्चों को कभी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि आप हर समय उन पर पहरा दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, जब वे कहीं बाहर जा रहे हों, तो उनसे पूछताछ करने के लहजे में सवाल न पूछें, बल्कि बहुत ही सामान्य और सकारात्मक तरीके से बात करें ताकि उन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
बच्चे नासमझ होते हैं, इसलिए उनसे गलतियां होना स्वाभाविक है। ऐसे में उन्हें बहुत ज्यादा डांटने की जगह ऐसी सीख देने की जरूरत है जिससे वे अपनी गलती सुधार सकें। बच्चों पर गुस्सा करना या उन पर हाथ उठाना उनके मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) को नुकसान पहुंचा सकता है। जब भी बच्चा कोई गलती करे, तो खुद को शांत रखें और ठंडे दिमाग से स्थिति को संभालते हुए उसे सही और गलत का अंतर समझाएं।
बच्चों को अनुशासित बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप खुद भी नियमों का पालन करें। केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी एक सख्त रूटीन बनाएं। सुबह समय पर उठने, निश्चित समय पर भोजन करने और रात को समय पर सोने का नियम बनाएं और इसका सख्ती से पालन करें। जब बच्चे आपको नियम का पालन करते देखेंगे, तो वे भी इसे आसानी से अपनी आदत बना लेंगे।
Location : New Delhi
Published : 17 July 2026, 3:58 PM IST