मौसम की तरह रंग बदलती है यह रहस्यमयी झील, जानिए यहां पहुंचने का सबसे आसान रास्ता

लद्दाख की विश्व प्रसिद्ध पैंगोंग त्सो झील अपने बदलते रंगों के लिए जानी जाती है। 14,270 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस रहस्यमयी झील तक पहुंचने का रूट, यात्रा का सही समय और इनर लाइन परमिट से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 3:02 PM IST

New Delhi: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की वादियों में स्थित पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) झील केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। फिल्म '3 इडियट्स' के क्लाइमैक्स सीन के बाद से यह झील हर भारतीय घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट का हिस्सा बन चुकी है।

इस झील की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि यह किसी एक रंग में स्थिर नहीं रहती, बल्कि दिन के अलग-अलग समय और मौसम के हिसाब से इसके पानी का रंग हल्के फिरोजी (Turquoise) से लेकर गहरे नीले और हरे रंग में बदलता रहता है।

क्यों बदलता है पानी का रंग?

समुद्र तल से लगभग 14,270 फीट (4,350 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग त्सो दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झीलों में शुमार है। इसके रंग बदलने के पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि विशुद्ध प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण हैं। जब सूरज की किरणें पानी की सतह पर अलग-अलग एंगल से पड़ती हैं, तो इसका दृश्य बदल जाता है।

इसके अलावा आसमान में बादलों की मौजूदगी, पानी का तापमान और आसपास फैले विशाल पहाड़ों की परछाई मिलकर पानी को नीले और हरे रंग के दर्जनों शेड्स देती है। खारा पानी होने के कारण इसमें मछलियां नहीं पाई जातीं, लेकिन प्रवासी पक्षी यहां हर साल आते हैं।

गणपति दर्शन के लिए सजे बॉलीवुड सितारे: मां बनने के बाद पहली बार दिखीं कैटरीना, तो आलिया-करीना के लुक ने लूटी महफिल

134 किमी लंबी झील का 60% हिस्सा चीन में

लगभग 134 किलोमीटर लंबी इस विशालकाय झील का दायरा बहुत बड़ा है। इसका केवल 40 प्रतिशत हिस्सा भारत (लद्दाख) के नियंत्रण में है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत हिस्सा तिब्बत (चीन के कब्जे वाला क्षेत्र) में पड़ता है। अधिकतम स्थानों पर इसकी चौड़ाई लगभग 5 किलोमीटर तक है, जिससे झील का किनारा किसी विशाल समुद्र जैसा अनुभव देता है।

कब बनाएं यात्रा का प्लान?

पैंगोंग त्सो का दीदार करने के लिए मई से सितंबर का महीना सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान लद्दाख के सभी प्रमुख मार्ग खुले रहते हैं और झील का पानी अपने सबसे सुंदर रंगों में चमकता है। वहीं, जो लोग माइनस तापमान और एडवेंचर पसंद करते हैं, वे जनवरी से मार्च के बीच आ सकते हैं जब पूरी झील जम जाती है और उस पर बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती है।

मानसून ट्रिप को यादगार बना देंगे ये ऑफबीट डेस्टिनेशंस

कैसे पहुंचें और परमिट के क्या हैं नियम?

लेह शहर से पैंगोंग झील की दूरी लगभग 150 से 170 किलोमीटर है, जिसे तय करने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। रास्ते में 17,590 फीट ऊंचा दुर्गम 'चांग ला दर्रा' पार करना पड़ता है। पर्यटक नुब्रा वैली के रास्ते भी यहां पहुंच सकते हैं। लेह का कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है।

चूंकि यह झील भारत-चीन सीमा के बेहद करीब स्थित है, इसलिए यहां जाने से पहले पर्यटकों को 'इनर लाइन परमिट' (ILP) लेना अनिवार्य होता है, जो लेह में डीसी ऑफिस या ऑनलाइन पोर्टल से आसानी से बन जाता है। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से बचने के लिए शरीर को एक्सीलिमेटाइज (एक्लिमेटाइज) करना जरूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  15 September 2026, 3:02 PM IST