
देर तक रोककर रखते हैं टॉयलेट (Img- Pinterest)
New Delhi: काम, सफर, स्कूल-कॉलेज या आसपास साफ टॉयलेट न मिलने के कारण कई लोग पेशाब की इच्छा को काफी देर तक नजरअंदाज (Holding Urine Side Effects) कर देते हैं। कभी-कभार ऐसा होना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर यह रोज की आदत बन जाए तो परेशानी खड़ी हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार पेशाब रोकने की आदत ब्लैडर की सामान्य कार्यप्रणाली पर असर डाल सकती है और कुछ लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI का खतरा भी बढ़ सकता है।
हमारी किडनी खून को फिल्टर करके अतिरिक्त पानी और शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। यह पेशाब ब्लैडर में जमा होता है। जब ब्लैडर भरने लगता है तो दिमाग को संकेत मिलता है कि अब टॉयलेट जाने की जरूरत है।
यही संकेत शरीर का सामान्य तरीका है। लेकिन जब कोई व्यक्ति बार-बार इस जरूरत को दबाता रहता है, तो ब्लैडर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नियमित रूप से पेशाब रोकना (Holding Urine Side Effects) ब्लैडर की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है और ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने में परेशानी हो सकती है।
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पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखने से ब्लैडर में पेशाब ज्यादा देर तक मौजूद रह सकता है। ऐसे में कुछ परिस्थितियों में बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिल सकता है और UTI का जोखिम बढ़ सकता है। UTI होने पर पेशाब करते समय जलन, बार-बार या तेज पेशाब लगना, निचले पेट में दर्द या असहजता और कभी-कभी पेशाब का धुंधला, बदबूदार या खून मिला दिखाई देना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति लगातार पेशाब की इच्छा को टालता रहे, तो समय के साथ ब्लैडर की मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में ब्लैडर को पूरी तरह खाली करना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस हो सकता है कि अभी कुछ पेशाब अंदर रह गया है।
हालांकि, पेशाब पूरी तरह खाली न होने की समस्या सिर्फ पेशाब रोकने (Holding Urine Side Effects) की आदत से ही हो, यह जरूरी नहीं है। इसके पीछे ब्लैडर की कमजोरी, पेशाब की नली में रुकावट, संक्रमण, कुछ दवाएं या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
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कुछ लोग टॉयलेट जाने की परेशानी से बचने के लिए पानी पीना ही कम कर देते हैं। ऐसा करना सही तरीका नहीं है। शरीर को जरूरत के मुताबिक पानी मिलना जरूरी है और पेशाब की इच्छा होने पर सुविधानुसार टॉयलेट जाना बेहतर माना जाता है। NIDDK भी नियमित रूप से पेशाब रोकने से बचने और ब्लैडर की जरूरतों पर ध्यान देने की सलाह देता है।
अगर पेशाब करते समय तेज दर्द या जलन हो, बार-बार UTI हो रहा हो, पेशाब में खून दिखाई दे, पेशाब शुरू करने में परेशानी हो या बार-बार ऐसा लगे कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर पेशाब बिल्कुल नहीं हो पा रहा हो और साथ में तेज निचले पेट का दर्द हो, तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है और तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
Location : New Delhi
Published : 25 August 2026, 9:04 AM IST