‘कामचोर’ कहने वालों के लिए तमाचा है यह सर्वे, वेकेशन पर भी 41% युवा कर रहे हैं काम!

ब्रिटेन की एक नई रिसर्च से खुलासा हुआ है कि छुट्टी मिलने के बावजूद Gen-Z के 41% युवा ऑफिस के काम से दूरी नहीं बना पा रहे हैं। मानसिक तनाव और महंगाई के दोहरे संकट के बीच कॉर्पोरेट जगत की इस सच्चाई और Gen-Z की असलियत पर आधारित खास रिपोर्ट।

Updated : 24 September 2026, 2:16 PM IST
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New Delhi: महीनों के कड़े इंतजार के बाद आखिरकार ऑफिस से छुट्टी मंजूर होती है, टिकट्स बुक होते हैं और बैग पैक हो जाता है। लेकिन जैसे ही घर से कदम बाहर निकलता है, फोन पर एक मैसेज चमक उठता है-"एक छोटा सा काम था..." बस! यहीं से वेकेशन का सुख, तनाव में बदल जाता है और लैपटॉप फिर से खुल जाता है। यह दर्द सिर्फ आपका नहीं है, बल्कि आज के युवाओं यानी Gen-Z की भी कहानी है।

चौंकाने वाले आंकड़े: छुट्टी पर भी काम करते हैं 41% Gen-Z

आम तौर पर यह धारणा बनाई जाती है कि आजकल के युवा काम से जी चुराते हैं और उन्हें थोड़ी-सी बात पर छुट्टी चाहिए होती है। लेकिन, ब्रिटेन की रोजगार कंपनी 'Employment Hero' द्वारा 40 हजार से अधिक कर्मचारियों पर किए गए एक ताजा सर्वे ने इस पुरानी सोच पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

इस रिसर्च के अनुसार, ब्रिटेन के कुल कर्मचारियों में से 27% लोग अपनी छुट्टियों के दौरान भी काम करते हैं। वहीं, Gen-Z की बात करें तो यह आंकड़ा हैरान करने वाला 41% है। इसका मतलब है कि वेकेशन पर जाने वाले हर 10 में से लगभग 4 युवा ऐसे हैं जो ऑफिस को पीछे छोड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

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मानसिक दबाव और महंगाई का दोहरा संकट

समंदर किनारे या पहाड़ों की वादियों में बैठकर भी Gen-Z के दिमाग में यही घूमता रहता है कि 'ऑफिस में क्या चल रहा होगा?' सर्वे में शामिल 39% युवाओं ने माना कि उनके लिए छुट्टियों में काम से पूरी तरह डिसकनेक्ट होना बेहदमुश्किल है। इसकी मुख्य वजह यह है कि 23% युवाओं पर उनके मैनेजर्स या टीममेट्स द्वारा हर वक्त उपलब्ध रहने का दबाव बनाया जाता है।

इस अत्यधिक कॉर्पोरेट दबाव का नतीजा यह है कि 32% युवाओं ने काम के तनाव के चलते अपनी छुट्टियां या तो आगे बढ़ा दीं या रद्द कर दीं। इसके अलावा, छुट्टी खत्म होने पर वापस काम पर लौटने के ख्याल से ही 49% कर्मचारी बेचैनी महसूस करते हैं।

इन सबके बीच महंगाई का एक और बड़ा संकट भी है। करीब 79% Gen-Z कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि बढ़ती कीमतों और महंगाई ने उनकी छुट्टियों और घूमने-फिरने के प्लान पर बुरा असर डाला है।

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क्या Gen-Z वाकई 'कामचोर' है?

एक तरफ ऑफिस का मानसिक दबाव है और दूसरी तरफ आसमान छूती महंगाई, जिसके बीच Gen-Z पिस रही है। हालांकि, कॉर्पोरेट जगत का नजरिया अब धीरे-धीरे बदल रहा है। 'HP' के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉर्ज ब्रैशर ने Gen-Z की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने युवाओं की सुनने की क्षमता, संबंध बनाने की कला, ग्राहकों की नब्ज पहचानने और टेक्नोलॉजी व AI को तेजी से अपनाने की काबिलियत को सराहा है।

काम और जिंदगी का संतुलन

जिस पीढ़ी को अक्सर 'कामचोर' कहकर खारिज कर दिया जाता है, वही छुट्टी के दौरान भी लैपटॉप बंद करने में डर महसूस करती है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि हम उन्हें सिर्फ कामचोर कैसे कह सकते हैं? सच तो यह है कि Gen-Z काम से भाग नहीं रही, बल्कि वह एक ऐसा कामकाजी माहौल चाहती है जहां काम भी हो, निजी जिंदगी भी हो और छुट्टी का मतलब वाकई में 'छुट्टी' हो।

Location :  New Delhi

Published :  24 September 2026, 2:16 PM IST

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